MP News: हरदा पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में (एनजीटी) ने पीड़ितों के पुनर्वास और अतिरिक्त मुआवजे को लेकर अहम हस्तक्षेप किया है. सेंट्रल जोन बेंच ने आदेश दिया है कि धमाके में गंभीर रूप से घायल और स्थायी दिव्यांगता झेल रहे लोगों की स्थिति की पुष्टि के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए.
क्या है पूरा मामला?
6 फरवरी 2024 को हरदा के बैरागढ़ क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 175 से अधिक लोग घायल हुए थे. एक व्यक्ति अब भी लापता बताया जा रहा है. हादसे की भयावहता ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दावा किया गया कि पीड़ितों को मुआवजे की बड़ी राशि पहले ही वितरित की जा चुकी है और संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए. वहीं, पीड़ित पक्ष की ओर से दलील दी गई कि दी गई राशि नुकसान और स्थायी चोटों की तुलना में पर्याप्त नहीं है. ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि वास्तविक पीड़ितों की पहचान और चोटों की प्रकृति का वैज्ञानिक सत्यापन आवश्यक है.
मेडिकल बोर्ड क्या काम करेगा?
इसी के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को निर्देश दिए गए हैं कि स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड गठित करें यह बोर्ड चोट की गंभीरता, दिव्यांगता की सीमा और उसका सीधे ब्लास्ट से संबंध होने की पुष्टि करेगा.
हरदा कलेक्टर को क्या निर्देश दिया गया है?
एनजीटी ने हरदा कलेक्टर को भी निर्देशित किया है कि प्रभावित लोग सीधे आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे. मेडिकल बोर्ड को तीन माह के भीतर रिपोर्ट तैयार करनी होगी. अगली सुनवाई 13 मई 2026 को तय की गई है, जिसमें रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त मुआवजे और दीर्घकालिक सहायता पर निर्णय लिया जाएगा. इस आदेश को पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब मुआवजे का निर्धारण प्रमाणित चिकित्सकीय रिपोर्ट पर आधारित होगा.
एनजीटी के मुख्य निर्देश
- गंभीर घायलों के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन.
- चोट और दिव्यांगता का वैज्ञानिक सत्यापन.
- तीन माह में रिपोर्ट तैयार करने का आदेश.
- रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त मुआवजे पर फैसला
मुख्य बातें
- पीड़ित सीधे कलेक्टर को दे सकेंगे आवेदन.
- सीएमएचओ करेंगे बोर्ड का गठन.
- अगली सुनवाई: 13 मई 2026.
- अंतिम निर्णय मेडिकल रिपोर्ट पर निर्भर.
