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MP News: रतलाम में लव मैरिज पर पंचायत का सख्त फरमान, कहा- ऐसे परिवार के यहां न पंडित पूजा कराएंगे, न दूधवाले आएंगे

The panchayat in Ratlam is taking a strict stance against love marriages

रतलाम में लव मैरिज के खिलाफ पंचायत सख्‍त

MP News: रतलाम जिले की पिपलौदा तहसील के पंचेवा गांव में पिछले छह महीनों के भीतर आठ लड़के-लड़कियों द्वारा घर से भागकर शादी करने के मामलों के बाद गांव की पंचायत ने कड़ा निर्णय लिया है. पंचायत और ग्रामीणों की बैठक में यह फैसला लिया गया कि लव मैरिज करने वाले युवक-युवती और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. पंचायत के निर्णय के अनुसार ऐसे परिवारों के घर न तो दूध जाएगा और न ही कोई अन्य सामान, साथ ही पंडित, नाई या अन्य कोई भी व्यक्ति उनके पारिवारिक या सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होगा. इतना ही नहीं, जो भी व्यक्ति ऐसे परिवारों का साथ देगा, उस पर भी सामाजिक प्रतिबंध लगाया जाएगा.

पंचों की बैठक में हुआ फैसला

यह फैसला तीन दिन पहले गांव में हुई पंचों और ग्रामीणों की बैठक में लिया गया, जिसका वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में एक व्यक्ति हाथ में रजिस्टर लेकर पंचायत के फैसले और लगाए गए प्रतिबंधों को पढ़कर सुनाता दिखाई दे रहा है. वह कहता है कि पंचेवा गांव के समस्त ग्रामीणों ने यह निर्णय लिया है कि जो भी लड़का-लड़की भागकर शादी करेगा, उसके परिवार पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होगा. वीडियो में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं और कुछ परिवारों के नाम लेकर भी बहिष्कार की बात कही गई है, जिससे संबंधित परिवारों में नाराजगी देखी जा रही है.

वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन आया हरकत में

वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया. जावरा एसडीएम सुनील जायसवाल के निर्देश पर पिपलौदा जनपद पंचायत के सीईओ बह्म स्वरूप हंस गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की. इस दौरान सरपंच भी मौके पर मौजूद रहे, हालांकि वे चुपचाप पीछे खड़े नजर आए. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश दी और वीडियो के आधार पर आगे कार्रवाई की बात कही.

लव मैरिज से बच्‍चों पर पड़ रहा गलत असर

ग्रामीणों का कहना है कि बीते छह महीनों में लगातार हो रही लव मैरिज की घटनाओं से गांव के बच्चों पर गलत असर पड़ रहा है, इसलिए यह फैसला लिया गया ताकि आगे ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके. वहीं, जिन परिवारों के नाम लेकर बहिष्कार की बात कही गई है, उनमें गहरा आक्रोश है और वे इस फैसले के खिलाफ कलेक्टर से शिकायत करने की तैयारी में हैं. कई लोगों ने पंचायत के इस निर्णय को संविधान के खिलाफ बताया है.

इस पूरे मामले पर जब जावरा एसडीएम सुनील जायसवाल और पिपलौदा जनपद सीईओ बह्म स्वरूप हंस से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो दोनों अधिकारियों ने कॉल रिसीव नहीं किया और न ही कोई प्रतिक्रिया दी.

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