MP News: एमपी के रीवा जिले के त्योंथर तहसील में रहने वाले एक रिटायर्ड फौजी का काम इन दिनों काफी चर्चा में है. वे अपने गांव में लगन और जुनून के साथ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं. वे महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दे रहे हैं तो बच्चों को सेना में जाने की तैयारी करवा रहे हैं, ताकि वे स्वावलंबी बन सकें. रिटायर्ड सैनिक योगेश कुमार तिवारी ने इसकी शुरुआत गांव में सिलाई सेंटर खोलकर की है. वे महिलाओं को सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें सिलाई भी सिखा रहे हैं, ताकि वे स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन सकें.
21 सालों तक की देश की सेवा
रीवा जिले के त्योंथर तहसील के मालपार गांव के रहने वाले योगेश तिवारी ने 21 सालों तक देश की सेवा की है. उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी सेवाएं दीं. कुछ समय पहले वे भारतीय सेना से रिटायर हुए, जिसके बाद वे अपने गांव वापस आ गए और गांव की लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठानी.
गांव की कुछ गरीब लड़कियां और महिलाएं गांव से 10 किलोमीटर दूर चाकघाट सिलाई प्रशिक्षण के लिए जाया करती थीं, जिससे उन्हें परेशानी होती थी. इस परेशानी को देखते हुए उन्होंने गांव में ही सिलाई केंद्र खोल दिया और सिलाई मशीन भी उपलब्ध करा दी. यही नहीं, उन्होंने ऐसी शुरुआत एक नहीं बल्कि कई गांवों में की, जहां महिलाओं और लड़कियों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग सिलाई सीखकर आत्मनिर्भर बन सकें और अपने लिए कुछ पैसे कमा सकें. इसके लिए लगने वाला खर्च वे अपनी पेंशन और सेना के दौरान मिले खर्चे से करते हैं.
वर्तमान में 100 महिलाएं ले रही प्रशिक्षण
वर्तमान समय में उनके यहां लगभग 100 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं. पूर्व सैनिक योगेश कुमार तिवारी प्रशिक्षण के लिए कपड़े, कैंची और अन्य जरूरी चीजों की व्यवस्था भी खुद ही करते हैं. उनकी इस पहल की सभी लोग सराहना कर रहे हैं. प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनी महिलाओं का कहना है कि फौजी भैया के प्रयासों के कारण ही वे आज आत्मनिर्भर हो पाई हैं और अपने तथा अपने परिवार का खर्च स्वयं चला पा रही हैं.
प्रधानमंत्री से मिली प्रेरणा
पूर्व सैनिक योगेश तिवारी का कहना है कि इस काम की प्रेरणा उन्हें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली. जिस तरह वे आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को आगे बढ़ा रहे हैं, उससे उन्हें भारतीय सेना में सेवा के दौरान ही यह प्रेरणा मिली थी. सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने गांव-गांव में इसकी शुरुआत की, जिसके कारण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और उन्हें इस बात की खुशी है.
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