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Indore News: भागीरथपुरा जांच आयोग बनने के बाद राज्य स्तरीय समिति भंग, अब कोर्ट में चलेगा मामला

Symbolic picture.

सांकेतिक तस्वीर.

Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में राज्य शासन ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए पहले से गठित राज्य स्तरीय समिति को निरस्त कर दिया है. यह फैसला हाई कोर्ट के निर्देश पर स्वतंत्र जांच आयोग के गठन के बाद लिया गया है. शासन का मानना है कि जब न्यायालय के आदेश पर विधिवत जांच आयोग गठित हो चुका है, तब समानांतर रूप से राज्य स्तरीय समिति का औचित्य नहीं रह जाता.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इंदौर में दूषित पानी की सप्लाई से कई लोग प्रभावित हुए थे, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया. घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने 19 जनवरी को एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी. इस समिति का उद्देश्य घटना के वास्तविक कारणों की जांच करना, आवश्यक तथ्यों का परीक्षण करना तथा प्रशासनिक, तकनीकी और प्रबंधन स्तर पर हुई संभावित लापरवाही का विश्लेषण करना था. समिति में अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला को अध्यक्ष बनाया गया था. इसके अलावा प्रमुख सचिव पी. नरहरि, संकेत भोंडवे और इंदौर संभाग के आयुक्त सुदाम खाड़े को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था. समिति को व्यापक अधिकार दिए गए थे ताकि वह पूरे घटनाक्रम की तह तक जाकर रिपोर्ट प्रस्तुत कर सके.

जांच आयोग का गठन किया गया

इसी बीच इंदौर हाई कोर्ट ने मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए आयोग गठित करने के निर्देश दिए. न्यायालय के आदेश के बाद पूर्व न्यायाधीश सुनील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया गया. आयोग को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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19 जनवरी को बनाई गई थी कमेटी

जांच आयोग के गठन के बाद राज्य शासन ने 19 जनवरी को बनाई गई समिति को तत्काल प्रभाव से भंग करने का निर्णय लिया. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अब पूरी जांच की जिम्मेदारी आयोग के पास होगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

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