Indore News: इंदौर के गोराकुंड चौराहे के पास सोमवार को करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से बनी स्मार्ट सिटी सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया. घटना नई पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान हुई. सड़क के नीचे से अचानक तेज दबाव के साथ पानी निकलने लगा और कुछ ही सेकंड में सड़क टूटकर नीचे बैठ गई. पूरा घटनाक्रम पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ है.
टेस्टिंग के दौरान सड़क के नीचे से निकला पानी
गोराकुंड चौराहे से करीब 20 मीटर दूर नई पानी की लाइन का कनेक्शन जोड़कर उसकी जांच की जा रही थी. इसी दौरान पाइपलाइन में पानी का दबाव बढ़ने से सड़क के नीचे से पानी बाहर आने लगा. तेज बहाव के साथ पानी सड़क पर फैल गया और कुछ ही देर में वहां बड़ा गड्ढा बन गया. मौके पर पहुंचे इंजीनियरों ने बताया कि पाइपलाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है और कनेक्शन के बाद उसकी टेस्टिंग की जा रही थी.
24 घंटे पानी की योजना अब तक अधूरी
स्मार्ट सिटी क्षेत्र में 24 घंटे जल प्रदाय के लिए नई पाइपलाइन बिछाई गई है. इस योजना पर 50 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं. पाइपलाइन का काम वर्ष 2021 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक नई व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है. फिलहाल इलाके में पुरानी लाइन से ही पानी की सप्लाई की जा रही है. योजना को पूरी तरह शुरू होने में करीब एक साल और लगने की बात सामने आई है.
तीन साल में ही सड़क की हालत खराब
गोराकुंड क्षेत्र स्मार्ट सिटी के एरिया बेस्ड डेवलपमेंट का हिस्सा है. एमजी रोड समेत आसपास के इलाकों में सड़क, ड्रेनेज और अंडरग्राउंड वायरिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं. करीब 40 करोड़ रुपए में बनी यह सड़क तीन साल भी नहीं टिक सकी. निर्माण के बाद कई बार सड़क पर पैचवर्क कराना पड़ा. बड़े आयोजनों के दौरान भी खराब हिस्सों को डामर डालकर ठीक किया जाता रहा.
एक दर्जन से ज्यादा पैच पहले ही खराब
सड़क पर अब तक एक दर्जन से अधिक जगहों पर पैच खराब होने की जानकारी सामने आ चुकी है. इन्हें ठेकेदार से दोबारा ठीक कराया गया. ऐसे में नई पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान सड़क का धंसना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
स्मार्ट सिटी सीईओ ने जांच की बात कही
स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन ने कहा कि घटना की जानकारी फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है. यदि सड़क धंसने की घटना हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी. करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सड़क और पानी की नई व्यवस्था का इस तरह पहली टेस्टिंग में ही सवालों के घेरे में आना जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है.
