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बड़वानी पंचायत की साधारण सभा में जोरदार हंगामा, अध्यक्ष ने CEO पर लगाए गंभीर आरोप, 7 दिनों में देना होगा जवाब

Barwani District Panchayat President levels serious allegations against CEO

बड़वानी जिला पंचायत में हंगामा

Barwani News (सचिन राठौड़ की रिपोर्ट): बड़वानी जिला पंचायत कार्यालय के सभा कक्ष में बुधवार को आयोजित साधारण सभा की बैठक हंगामेदार रही. जिला पंचायत अध्यक्ष बलवंत सिंह पटेल ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के खिलाफ 10 सूत्रीय आरोप-पत्र पेश किया, जिसमें गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख है. बैठक में कांग्रेस विधायक मोंटू सोलंकी सहित अन्य सदस्यों ने भी नारेबाजी की.

जिला पंचायत अध्यक्ष ने क्या कहा?

जिला पंचायत अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि CEO ने मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993, जिला पंचायत कार्य नियम 1998 और अन्य संबंधित प्रावधानों का लगातार उल्लंघन किया है. इससे निर्वाचित परिषद के अधिकारों का हनन हुआ है और जिले में पंचायती राज व्यवस्था कमजोर हुई है.

आरोप पत्र में क्या कहा गया है?

आरोप-पत्र में कहा गया है कि सक्षम अधिकार के बिना और लेखा नियम 1999 के नियम 19(2) का उल्लंघन करते हुए जिला पंचायत का बैंक खाता बदला गया. इसके अतिरिक्त, शासनादेश 13.11.2024 को दरकिनार कर आर.ई.एस. (RES) और मनरेगा (MGNREGA) के उपयंत्रियों के क्लस्टर बदले गए और कलेक्टर को गुमराह किया गया. कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली (CR) भी अध्यक्ष को अवलोकन के लिए प्रस्तुत नहीं की गई.

अन्य आरोपों में धारा 73 के तहत वार्षिक प्रशासनिक प्रतिवेदन और अंतिम लेखा परिषद में प्रस्तुत न करना शामिल है. हर तीन माह का आय-व्यय ब्यौरा स्थायी समिति को नहीं दिया गया, और स्थायी समितियों की बैठकें भी नहीं कराई गईं, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हुआ.

कैबिनेट मंत्री के निर्देशों को भी नहीं माना

आरोप-पत्र में यह भी उल्लेख है कि मंत्री प्रहलाद पटेल के निर्देशों के बावजूद सचिवों और रोजगार सहायकों के स्थानांतरण में अध्यक्ष से सहमति नहीं ली गई. जनहित के विषयों को नियम 17 का उल्लंघन करते हुए अध्यक्ष के समक्ष विचारार्थ नहीं रखा गया. धारा 52 के तहत वित्तीय प्रकरणों को परिषद से अनुमोदित कराए बिना ही स्वीकृत किया गया, और स्वच्छ भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), एन.आर.एल.एम. (NRLM) और मिड डे मील जैसी योजनाएं समिति की अनुमति के बिना स्वेच्छा से लागू की गईं.

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7 दिनों के भीतर देना होगा जवाब

आरोप-पत्र में CEO को 7 कार्य दिवस के भीतर सभी बिंदुओं पर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है. यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार को अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा भेजी जाएगी. बैठक के दौरान दोनों दलों के सदस्यों की नारेबाजी के कारण कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया था. जिला पंचायत सीईओ काजल जावला ने बताया कि उक्त आरोप निराधार है, जो भी कार्य किए गए वो नियमानुसार ही किए गए.

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