Barwani News: बड़वानी जिला मुख्यालय के कालिका माता मंदिर में नवरात्रि के बाद होने वाले भंडारे को लेकर शुक्रवार (2 अक्टूबर) रात एक बैठक हुई. इसमें खरगोन-बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई और पूर्व मंत्री प्रेमसिंह पटेल सहित कई नेता और ग्रामीण शामिल हुए. बैठक के दौरान सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने हिंदुओं को एकजुट रहने की सलाह दी. उन्होंने ‘हम दो, हमारे पांच’ का नारा देते हुए कहा कि हर हिंदू को कम से कम पांच बच्चे पैदा करने चाहिए.
‘भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे’
सांसद पटेल ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में संतुलन नहीं रहा, तो भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि हिंदुओं की जन्म दर 1.9 है, जबकि अन्य समाज की 2.9 है. चार बच्चों में से एक हिंदू और तीन अन्य समाज के होते हैं.
उन्होंने युवाओं से समय पर शादी करने और पांच बच्चे पैदा करने का आग्रह किया. सांसद ने कहा कि देश की रक्षा के लिए हिंदू समाज को अपनी जनसंख्या बढ़ाने की चिंता करनी चाहिए. मैं सांसद बाद में हूं, आपका भाई पहले हूं. मैं चाहता हूं कि आप सब लोग माता की भक्ति के साथ ही अपने परिवार की शक्ति को एकत्रित करे अपने मोहल्लो की शक्ति को एकत्रित करें. हम ही हमारे परिवार और मोहल्ले के रक्षक हैं.
‘सनातनी ही एक-दूसरे के काम आएगा’
बैठक में सांसद ने सलाह देते हुए कहा जिम नहीं जाना चाहिए. जिम जाने की बजाय घर पर ही योग करने की सलाह दी. या अखाड़े जाने को कह. जिम ज्यादा हो रहे हैं. अखाड़े खत्म हो रहे, अखाड़े बढ़ाओ. जिम में सिर्फ बॉडी बन रही है. लड़ने की क्षमता नहीं बढ़ रही है. व्यायाम शाला और अखाड़े बढ़ना चाहिए जहां लड़ने की क्षमता बढ़ती है. जब इस देश पर परिस्थितियां बदलेगी, तब सनातनी ही एक दूसरे के काम आएगा. कांग्रेस और बीजेपी आगे नहीं आएगी.
‘थ्री डी पर काम कर रहा हूं’
उन्होंने कहा कि थ्रीडी पर काम कर रहा हूं. दहेज, डीजे और दारू. आज डीजे पर नाचने वाला 100 परसेंट समाज सनातनी समाज है. नाचता है ऐसा कि किसी को समझ नहीं आएगा कि कैसा नाच रहा है. नाचने वाले को खुद को पता नहीं की उसके हाथ पांव कहा जा रहे हैं. जीते पर नाचने वाले 90 परसेंट लोगों में 60 परसेंट लोग नशा करके डीजे में नाचते हैं. रोड़ पर सिर्फ हिंदू समाज का ही आदमी नशे में आपको दिखेगा. दूसरे समाज का आदमी नशे में रोड़ पर नहीं दिखेगा.
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उन्होंने सनातन परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि हमारे देवी-देवता जहां एक हाथ से आशीर्वाद देते हैं, वहीं उनके दूसरे हाथ में शस्त्र भी होते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपरीत परिस्थितियों में देश, समाज, व्यक्ति और यहां तक कि संविधान की सुरक्षा के लिए भी शस्त्रों (हथियारों या सुरक्षा बलों) का सहयोग लेना पड़ता है. जब किसी की जान पर आफत आती है, तो कानून भी आत्मरक्षा का अधिकार देता है.
