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बड़वानी में नीट पेपर लीक को लेकर तीसरे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी, प्रदर्शनकारी बोले – अब ये आर-पार की लड़ाई है

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बड़वानी में छात्रों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी

Barwani Protest (सचिन राठौड़ की रिपोर्ट): बड़वानी में नीट-यूजी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धांधली के विरोध में छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है. विभिन्न सामाजिक, छात्र और युवा संगठनों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. लगातार बारिश के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने प्लास्टिक की पल्ली तानकर अस्थायी शेड बनाया और उसके नीचे डटे रहे.

धरनास्थल पर पुलिसबल तैनात

धरना स्थल पर पारंपरिक दरी के बजाय तख्त लगाकर मंच जैसी व्यवस्था की गई है. प्रदर्शनकारी संविधान की प्रति और महापुरुषों के चित्रों को सामने रखकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज करा रहे हैं. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धरना स्थल पर पुलिस बल भी तैनात है.

प्रदर्शनकारियों ने क्या मांग रखीं?

प्रदर्शनकारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराना, और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शामिल है.

‘अब ये आर-पार की लड़ाई है’

NSUI के बादल गिरासे और जयस के पदाधिकारियों ने आंदोलन में शामिल होते हुए कहा कि पेपर लीक के कारण लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है. एक कार्यकर्ता ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम दिन-रात पढ़ाई करते हैं, लेकिन पेपर लीक के कारण हमारी सारी मेहनत बर्बाद हो जाती है. अब यह आर-पार की लड़ाई है.”

धरने के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की. उन्होंने लद्दाख में पर्यावरण और शिक्षा के मुद्दों पर आंदोलन कर रहे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में भी नारे लगाए.

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‘आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा’

जयस की पदाधिकारी सीमा वास्कले ने जोर देकर कहा कि देशभर के छात्र एकजुट हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा. वास्कले ने कहा, “यह केवल बड़वानी का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के हर उस छात्र का मुद्दा है जो ईमानदारी से परीक्षा देना चाहता है.” पिछले दो दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश के कारण धरना स्थल पर कीचड़ हो गई है, जिससे बचाव के लिए कार्यकर्ताओं ने पल्ली बांधकर शेड लगाया है और गीली जमीन पर दरी की जगह लकड़ी के तख्तों का उपयोग किया है.

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