25 बेड की परमिशन, 200 से ज्यादा मरीज भर्ती, बुरहानपुर में गुड हॉस्पिटल सील, आयुष्मान योजना में गड़बड़ी की भी जांच

जिला कलेक्टर हर्ष सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि अस्पताल निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा था. इसी कारण नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील किया गया है.
'Good Hospital' in Burhanpur was sealed after admitting 200 patients, despite having permission for only 25 beds.

बुरहानपुर में 25 बेड की अनुमति मिलने के बाद 200 मरीजों को भर्ती करने पर गुड अस्पताल सील किया गया.

Input- मौसिम तड़वी

MP News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में स्वास्थ्य विभाग की हालिया कार्रवाई के बाद गुड हॉस्पिटल एक बार फिर सुर्खियों में है. विभाग का दावा है कि महज 25 बेड की अनुमति वाले इस अस्पताल में क्षमता से कई गुना अधिक मरीज भर्ती किए गए थे. अस्पताल में व्यवस्थाओं की गंभीर कमी मिलने पर एक माह पहले अस्थायी रूप से लाइसेंस निलंबित कर नए मरीज भर्ती नहीं करने तथा पहले से भर्ती मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन जांच के दौरान जो स्थिति सामने आई, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया.

निरीक्षण के दौरान 200 मरीज भर्ती मिले

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दोबारा निरीक्षण के दौरान अस्पताल में 200 से अधिक मरीज भर्ती मिले. आरोप है कि अस्पताल ने विभागीय निर्देशों की अनदेखी करते हुए लगातार नए मरीज भर्ती किए. निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर के अलावा एक रेस्टोरेंट और उसके किचन तक को अस्थायी वार्ड में बदलकर मरीजों का उपचार किया जा रहा था. जहां कभी लोग भोजन करते थे, वहां बेड लगाकर जनरल वार्ड बना दिया गया था, जबकि रेस्टोरेंट के किचन में भी मरीज भर्ती होने के आरोप सामने आए.

जांच टीम को अस्पताल में कई आवश्यक सुविधाओं की कमी भी दिखाई दी. आरोप है कि मरीजों की संख्या के अनुरूप न तो पर्याप्त चिकित्सा संसाधन उपलब्ध थे और न ही अस्पताल से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की समुचित व्यवस्था थी. विभाग ने अस्पताल से संबंधित कई दस्तावेज जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है.

आयुष्मान योजना के नाम पर अनियमितताओं का जांच

मामले में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर भी गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है. जांच के दायरे में यह भी शामिल है कि मरीजों को गांव-गांव जाकर मुफ्त इलाज का लालच देकर भर्ती किया गया या नहीं. आरोप है कि भर्ती के बाद मरीजों के आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड अस्पताल प्रबंधन अपने पास रख लेता था. जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं होता था, उनके लिए भी तत्काल कार्ड बनवाने की प्रक्रिया कराई जाती थी. इन सभी पहलुओं की विभागीय स्तर पर जांच जारी है.

जिला कलेक्टर हर्ष सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि अस्पताल निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा था. इसी कारण नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील किया गया है. उन्होंने कहा कि मरीजों को किन परिस्थितियों में भर्ती किया गया और उपचार किस आधार पर किया जा रहा था, इसकी विस्तृत जांच कराई जा रही है. यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी.

पहले भी दी गई थी चेतावनी

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल को पहले ही व्यवस्थाएं सुधारने का अवसर दिया गया था, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया गया. इसके उलट मरीजों की संख्या लगातार बढ़ाई गई, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए. अब पूरे मामले की जांच दस्तावेजों, मरीजों के रिकॉर्ड और आयुष्मान योजना से जुड़े अभिलेखों के आधार पर की जा रही है.

सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि क्षमता से कहीं अधिक मरीज भर्ती करने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण मरीजों के जीवन को खतरे में डाला गया, तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत गंभीर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए जा सकते हैं. हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा.

अन्य प्राइवेट अस्पतालों पर भी होगी कार्रवाई

गुड हॉस्पिटल पर हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य निजी अस्पताल भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में आ गए हैं. माना जा रहा है कि अब ऐसे सभी अस्पतालों की जांच की जाएगी, जहां क्षमता, लाइसेंस, आयुष्मान योजना या अन्य नियमों के पालन को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. फिलहाल पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच पूरी होने के बाद विभाग और प्रशासन आगे क्या बड़ा कदम उठाते हैं.

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