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Indore News: 100 करोड़ का कुमेड़ी ISBT 2 साल से बंद, अब टर्मिनल में लगा भंडारा, कांग्रेस नेता भी हुए शामिल

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Indore News: इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया गया टंट्या मामा भील अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) कुमेड़ी अब तक यात्रियों के लिए शुरू नहीं हो सका है. आधुनिक सुविधाओं से लैस इस टर्मिनल में जहां बसों के संचालन का इंतजार है, वहीं सावन के अवसर पर परिसर में भंडारे का आयोजन होने से इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

बता दें कि, कुमेड़ी ISBT परिसर में स्थित प्राचीन शिव मंदिर में सावन मास के अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया. इस दौरान टर्मिनल के अंदर पूरियां तली गईं और यात्रियों के लिए बनाई गई सीटों पर श्रद्धालुओं को कतार में बैठाकर प्रसाद वितरित किया गया.

दो साल से बस संचालन का इंतजार

आईडीए ने कुमेड़ी में अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के निर्माण और इसके लिए जमीन अधिग्रहण पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं. टर्मिनल को आधुनिक और एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस किया गया है, लेकिन करीब दो साल बीतने के बावजूद यहां से नियमित बस संचालन शुरू नहीं हो पाया है. बस संचालन शुरू करने की तारीख भी अभी तक तय नहीं हो सकी है. ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह परिसर अपने मूल उद्देश्य से अलग गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता नजर आ रहा है.

बिना अनुमति हुआ आयोजन

जानकारी के मुताबिक, भंडारे का आयोजन क्षेत्र के किसान सुभाष चौधरी ने कराया था. बताया जा रहा है कि इसके लिए आईडीए से अनुमति नहीं ली गई थी. मामले में आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े ने कहा कि उन्हें आयोजन की जानकारी नहीं है और इसकी जांच कराई जाएगी.

आयोजन में पहुंचे कांग्रेस नेता

भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. शहर कांग्रेस के पदाधिकारी और पार्षद भी आयोजन में पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया. इसे लेकर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं. गौरतलब है कि कुमेड़ी ISBT के संचालन में हो रही देरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाता रहा है. ऐसे में उसी परिसर में आयोजित भंडारे में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

करोड़ों की लागत, लेकिन मूल उद्देश्य अधूरा

कुमेड़ी ISBT को शहर में अंतरराज्यीय बस परिवहन को बेहतर बनाने और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया था. हालांकि, बसों का संचालन शुरू नहीं होने के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बना यह टर्मिनल फिलहाल अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पा रहा है. अब परिसर में भंडारे का आयोजन होने से इसके रखरखाव, सुरक्षा और उपयोग को लेकर भी नए सवाल खड़े हो गए हैं.

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