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Rahul Gandhi के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय को जाएगा न्योता? सज्जन वर्मा ने बोले-‘वृद्धों की गूंज’ में बुलाएंगे

rahul gandhi indore

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Rahul Gandhi Indore: इंदौर में राहुल गांधी के बहुचर्चित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले सियासत लगातार गरमाती जा रही है. लंबे समय तक नेहरू स्टेडियम को लेकर चली कांग्रेस की जद्दोजहद के बाद आखिरकार पार्टी ने अपना नया मैदान तय कर दिया है. अब रीजनल पार्क के सामने उसी ग्राउंड पर कांग्रेस ने तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं. ग्राउंड पर तमाम व्यवस्थाओं को के लिए कांग्रेस की पूरी टीम जुट गई है. यानी लोकेशन फाइनल है, तैयारियां तेज हैं और राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने अपना पूरा फोकस अब इसी मैदान पर लगा दिया है.

कहानी सिर्फ मैदान बदलने तक सीमित नहीं

जिस ग्राउंड पर तैयारी चल रही है वहां से और यह लोकेशन फाइनल है, लेकिन कहानी सिर्फ मैदान बदलने तक सीमित नहीं है. लोकेशन बदली है, लेकिन सियासत अभी भी नेहरू स्टेडियम पर ही अटकी हुई है. कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस की हालिया बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को एक ऐसी जिम्मेदारी दे दी, जिसने प्रदेश की सियासत में नया मसाला डाल दिया.जिम्मेदारी है-मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर जाकर उन्हें और उनके परिवार को राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता देना.

न्योते के पीछे की सियासत

एक तरफ सज्जन सिंह वर्मा और दूसरी तरफ कैलाश विजयवर्गीय-दोनों ही मध्य प्रदेश की राजनीति के ऐसे चेहरे हैं, जिनके बीच राजनीतिक बयानबाजी कोई नई बात नहीं है. दोनों नेता कई मौकों पर एक-दूसरे पर तीखे हमले करते नजर आए हैं. और अब कांग्रेस ने इसी सियासी समीकरण के बीच सज्जन वर्मा को कैलाश विजयवर्गीय के घर भेजने की जिम्मेदारी दे दी.यही वजह है कि सज्जन सिंह वर्मा का बयान आते ही सियासी पारा और चढ़ गया.वर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर ‘वृद्धों की गूंज’ होगी, तो कैलाश विजयवर्गीय को बुलाने के लिए उनके घर जरूर जाएंगे.

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का रखा पक्ष

लेकिन इसके बाद उन्होंने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस का पक्ष भी साफ किया. उनका कहना है कि यह एक पवित्र कार्यक्रम है, जिसका मकसद युवा पीढ़ी के भविष्य को लेकर संवाद करना है. वहीं दूसरी तरफ सज्जन सिंह वर्मा ने नेहरू स्टेडियम को लेकर सरकार पर भी सीधा हमला बोला. उनका सवाल है कि जब विधायक के बेटे को स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति दी गई, तब नियमों की याद क्यों नहीं आई? लेकिन जब राहुल गांधी के कार्यक्रम की बात आई तो परमिशन और नियमों का हवाला दिया जाने लगा.

स्टेडियम का मुद्दा अभी भी राजनीतिक हथियार

कांग्रेस के लिए मैदान भले ही बदल गया हो, लेकिन स्टेडियम का मुद्दा अभी भी राजनीतिक हथियार बना हुआ है. एक तरफ रीजनल पार्क के सामने कांग्रेस का नया ग्राउंड तैयार हो रहा है, दूसरी तरफ बयानों का मंच लगातार गरम हो रहा है. ग्रेस अब यह संदेश देने में जुटी है कि नेहरू स्टेडियम नहीं मिला तो क्या हुआ, राहुल गांधी का कार्यक्रम रुकेगा नहीं.नया मैदान तैयार है, कार्यकर्ता मैदान में हैं और तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं. हीं बीजेपी के सामने अब कांग्रेस के इस कार्यक्रम और लगातार हो रही बयानबाजी का जवाब देने की चुनौती है.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस कार्यक्रम का नाम ही ‘छात्रों की गूंज’ है, उसके पहले सबसे ज्यादा गूंज नेताओं के बयानों की सुनाई दे रही है.सज्जन सिंह वर्मा की जिम्मेदारी ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है-क्या कांग्रेस का यह न्योता वास्तव में राजनीतिक सद्भाव का संदेश है या फिर कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ एक और सियासी दांव?

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