Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर में जल संकट के बीच जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिले को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है. इसके साथ ही निजी बोरिंग पर पाबंदी लगा दी गई है. यह प्रतिबंध अगले आदेश तक जारी रहेगा. संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इसे सख्ती से पालन करने के आदेश दिए हैं.
2 साल तक की हो सकती है जेल
इंदौर में अब मनमाने तरीके से बोरिंग नहीं करा सकेंगे. प्रशासन ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी और अशासकीय नलकूपों की खुदाई पर प्रतिबंध लगा दिया है. नियम तोड़ने पर 2 हजार रुपये तक जुर्माना या 2 साल तक की जेल का प्रावधान है. हालांकि, सरकारी योजनाओं के तहत बोरिंग पर छूट रहेगी, जबकि विशेष परिस्थितियों में तय प्रक्रिया के तहत अनुमति मिल सकती है. प्रशासन का मकसद गिरते भूजल स्तर को रोकना और आने वाले समय में पेयजल संकट से निपटना है.
इंदौर में कम बारिश का असर
IMD के मुताबिक हर साल इंदौर में 33 से 34 इंच बारिश होती है. इस बार ये आंकड़ा 23 इंच तक ही रहा. इसका सीधा सा अर्थ है कि बारिश कम हुई है. 26 साल के इतिहास में इतनी कम बारिश हुई है. बड़ा बिलावली झील और यशवंतसागर जैसे जलाशयों में जल स्तर काफी गिर गया है. इसका असर शहर के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है. इसके साथ ही मालवा और निमाड़ के कई शहरों में बारिश कम हुई है.
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जल संरक्षण के लिए अभियान
इंदौर में जल संरक्षण अभियान की शुरुआत हो गई है. लोगों को पानी बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. वहीं, पानी का दुरुपयोग करने वालों पर स्पॉट फाइन लगाया जा रहा है. कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय वीडियो जारी करके बार-बार कह चुके हैं कि इंदौर में जल संकट आना तय है. पानी का अव्यय रोककर इसे बचाने का प्रयास करें.
