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इस पटवारी से बड़ा ‘नटवरलाल’ नहीं देखा होगा! दूसरों के घर-जमीन समेत 51 पट्टे करा लिए अपने और पत्नी के नाम

khandwa News

निलंबित पटवारी और उसकी पत्नी

khandwa Patwari Big Scandal: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से फर्जीवाड़े का ऐसा मामला सामने आया है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. दरअसल पीएम मोदी के जन्मदिन वाले दिन यानी 17 सितंबर से प्रदेश में ‘स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ लागू हुई थी. इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी के पात्र परिवारों को निशुल्क आवासीय भू-अधिकार और रजिस्ट्री दिलाना है.

गांव बसा नहीं और लुटेरे पहले आ गए

लेकिन वो एक कहावत आपने जरूर सुनी होगी कि ‘गांव बसा नहीं और लुटेरे पहले आ गए’, बस यही कहावत इस मामले पर एकदम सटीक बैठती है. खंडवा जिले के कोलगांव में योजना की शुरुआत से पहले ही भारी गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। यहां गांव के तत्कालीन पटवारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए सार्वजनिक संपत्तियों और ग्रामीणों की जमीन समेत कुल 51 पट्टे अपने और अपनी पत्नी के नाम दर्ज करा लिए.

कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने किया खुलासा

इस जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब खंडवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने इस मामले की परतें खोलीं. उन्होंने दस्तावेजों के हवाले से बताया कि कोलगांव में कुल 935 आवासीय पट्टे जारी किए गए हैं. इनमें से अकेले पटवारी मंडलोई के नाम 48 और उनकी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम 3 पट्टे दर्ज मिले हैं.

जमीनों के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी

गांव की जमीनों के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी जिस पटवारी के कंधों पर थी, उसी के परिवार के नाम इतने पट्टे दर्ज होने की खबर से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. गांव के ही निवासी शुभम तोमर की शिकायत का हवाला देते हुए बताया गया कि उनके घर के पीछे खाली मैदान और एक सार्वजनिक बावड़ी स्थित है। स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि इस पूरे सार्वजनिक उपयोग के हिस्से का पट्टा राजेश मंडलोई के नाम चढ़ा दिया गया है.

चौंकाने वाला खुलासा

इस पूरे मामले में खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने जांच कराने के आदेश दिए. जब वर्तमान पटवारी राकेश पटेल ने दस्तावेज खंगाले और जांच की तो जो पाया वह चौंकाने वाला था. बस स्टैंड पर बने आरसीसी छत वाले सार्वजनिक चबूतरा, ग्रामीण बलिराम के खसरा नंबर 530 में दर्ज रहवासी मकान को भी रिकॉर्ड में पटवारी के नाम चढ़ा दिया गया था. इतना ही नहीं कई अन्य सरकारी व सार्वजनिक उपयोग की जमीनें भी पटवारी के रिकॉर्ड में मिलीं।

जांच रिपोर्ट मिलते ही कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पटवारी राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

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