2800 Malicious Apps Busted: मुंबई क्राइम ब्रांच ने 36 साल के सॉफ्टवेयर डेवलपर को गिरफ्तार किया है. उस पर आरोप है कि वह इंदौर में बैठकर खतरनाक APK फाइलें तैयार कर रहा था. इसके साथ ही साइबर ठगों को इन्हें बेच रहा था. इसकी मदद से ठगों ने देशभर के 9 हजार से ज्यादा लोगों अपना शिकार बनाया और 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की. पुलिस ने दावा किया है कि ठगों ने 150 करोड़ रुपये की ठगी की है.
कैसे हुआ साइबर ठगी का खुलासा?
दरअसल, मुंबई में रहने वाले 72 साल के बुजुर्ग के साथ 5.62 लाख रुपये की ठगी हुई. 13 अगस्त को भायखला पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया गया. इसके बाद जांच को मुंबई क्राइम की प्रॉपर्टी सेल और साइबर सेल को सौंपी गई. ठगों ने खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताया. सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा दिया. इसके बाद उन्होंने व्हाट्सएप पर ‘सीनियर सिटीजन कार्ड वेरिफिकेशन.apk’ नाम की फाइल भेजी. इसे डाउनलोड करते ही बैंक खाता खाली हो गया.
जांच के आधार पर पुलिस के हत्थे इंदौर का सॉफ्टवेयर डेवलपर पंकज अवधेश गुप्ता चढ़ा. पुलिस ने उसके ठिकाने से एक सीपीयू, 3 हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, वाई-फाई राउटर और 3 मोबाइल फोन जब्त किया गया.
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गेमिंग एप बनाने से की शुरुआत
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि पंकज अवधेश गुप्ता इंजीनियरिंग की पढ़ाई दूसरे साल में छोड़ दी थी. इसके बाद उसने गेमिंग एप बनाना शुरू किया. इसी दौरान उसने APK फाइल बनाना भी सीख लिया. धीरे-धीरे वह साइबर ठगों के संपर्क में आने लगा. जानकारी के मुताबिक पिछले तीन सालों से इस अवैध धंधे में शामिल है. सबसे बड़ी बात ऐसी एप तैयार करके साइबर ठगों को बेच रहा था, जिसकी मदद से संवेदनशील जानकारी और ओटीपी चुराने का काम किया जा रहा था. आरोपी ने व्हाट्सएप पर ‘पेंशन कार्ड वेरिफिकेशन’, ‘सीनियर सिटीजन कार्ड’, ‘RTO चालान’, क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन और अपडेट जैसी APK फाइल तैयार की थी.
