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Indore: अंतरराष्ट्रीय मेहमानों से गुलजार हुआ इंदौर का सिरपुर लेक, हजारों किलोमीटर दूर ठंडे इलाकों से आए प्रवासी पक्षी

Indore Sirpur Lake

सिरपुर लेक इंदौर

Indore Sirpur Lake: इंदौर के पश्चिमी हिस्से में स्थित सिरपुर लेक इस बार भी सर्दियों के मौसम में अंतरराष्ट्रीय मेहमानों से आबाद हो गया है. हर साल की तरह इस बार भी दूर-दराज के बेहद ठंडे इलाकों से आए प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट यहां के माहौल को जीवंत बना रही है. साफ पानी और अनुकूल वातावरण के कारण यह स्थान दुनिया भर के परिंदों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाता है. सिरपुर की लहरों पर रंग-बिरंगे पक्षियों को तैरते और खेलते देखना अपने आप में खास अनुभव होता है.

सितंबर से ही बड़ी संख्‍या में आने लग जाते हैं पक्षी

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट के मुताबिक सितंबर से ही यहां बड़ी संख्या में पक्षियों का आना शुरू हो जाता है और अप्रैल तक यही तालाब उनका स्थायी ठिकाना बना रहता है. तालाब का स्वच्छ पानी और आसपास की हरियाली उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षा देती है, जिससे यह जगह उनके प्रजनन के लिए भी अनुकूल बन जाती है. यहां मौजूद जलीय पौधे, कीड़े-मकोड़े और छोटी मछलियां इन पक्षियों का मुख्य आहार होती हैं.

भारत के सुरक्षित स्‍थानों पर आतें हैं पक्षी

दरअसल, साइबेरिया, मंगोलिया, रूस और चीन जैसे ठंडे इलाकों में जब बर्फबारी शुरू होती है तो वहां भोजन की कमी हो जाती है. ऐसे में ये नन्हे परिंदे हजारों किलोमीटर लंबा और कठिन सफर तय कर भारत के कुछ सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करते हैं, जिनमें इंदौर का सिरपुर लेक प्रमुख है.

इन पक्षियों का होगा ठिकाना

यहां सबसे ज्यादा रुडी शेल्डक यानी सुर्खाब दिखाई देते हैं, जिनका केसरिया रंग तालाब की सुंदरता बढ़ा देता है. इनके अलावा लंबी गर्दन और खास चोंच वाले पिनटेल और शोवलर भी साइबेरिया से यहां पहुंचते हैं. दुनिया के सबसे ऊंचा उड़ान भरने वाले पक्षियों में गिने जाने वाले बार-हेडेड गूज, जिन्हें राजहंस भी कहा जाता है, हर साल हिमालय पार कर यहां आते हैं. कॉमन कूट और कॉर्मोरेंट जैसे गोताखोर पक्षी भी लंबी दूरी तय कर इस तालाब को अपना ठिकाना बनाते हैं.

सिरपुर को मिला रामसर साइट का दर्जा

अपने समृद्ध जैविक वातावरण के कारण सिरपुर को रामसर साइट का दर्जा मिला हुआ है. इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड माना जाता है, जो पक्षियों के रहने और प्रजनन के लिए सुरक्षित जगहों में शामिल है. यदि कोई इन प्रवासी मेहमानों को करीब से देखना चाहता है तो सुबह या शाम का समय सबसे बेहतर माना जाता है, जब पक्षी तालाब के किनारों पर सक्रिय दिखाई देते हैं.

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