Input- पारसराम
MP News: मोहर्रम के पवित्र महीने में जहां मुस्लिम समाज इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिया और अखाड़ों की तैयारियों में जुटा है, वहीं सागर जिले के गढ़ाकोटा नगर से हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल की तस्वीरे सामने आई हैं. यहां एक हिंदू परिवार पिछले लगभग ढाई सौ वर्षों से मोहर्रम के अवसर पर ताजिया और बुर्राख बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम कर रहा है.
पीढ़ियों से हो रहा ताजिया का निर्माण
दरअसल, गढ़ाकोटा के सुभाष वार्ड निवासी अभिषेक विश्वकर्मा का परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा का निर्वहन कर रहा है. अभिषेक विश्वकर्मा बताते हैं कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और आज भी पूरे परिवार द्वारा श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाई जा रही है. मोहर्रम से करीब दो माह पहले ही ताजिया निर्माण का कार्य शुरू हो जाता है. बांस की खपच्चियों, रंगीन कागज, कपड़े और अन्य सामग्री से आकर्षक ताजिया एवं बुर्राख तैयार किए जाते हैं.
अभिषेक विश्वकर्मा का कहना है कि यह उनके लिए केवल एक कला नही बल्कि आस्था और इंसानियत की सेवा है. उनके अनुसार उनके बुजुर्गों ने उन्हें हमेशा सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाया है और यही परंपरा आज भी जारी है.
खटीक और रैकवार परिवार भी पेश कर रहा गंगा-जमुना तहजीब
गढ़ाकोटा में केवल विश्वकर्मा परिवार ही नहीं, बल्कि एक खटीक और एक रैकवार परिवार भी वर्षों से अपने यहां ताजिया बनाने की परंपरा निभा रहे हैं. यही कारण है कि नगर में गंगा-जमुनी तहजीब की झलक साफ दिखाई देती है. ईद, होली, दिवाली समेत सभी त्योहार यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय मिल-जुलकर मनाते हैं.
मोहर्रम के दौरान पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव भी ताजिया मैदान पहुंचकर मुस्लिम समाज के लोगों से मुलाकात करते हैं और जुलूस में शामिल होते हैं. इस साल 26 जून को मोहर्रम का पर्व नगर में पारंपरिक उत्साह और भाईचारे के साथ मनाए जाने की तैयारी है. बहरहाल सागर जिले गढ़ाकोटा की यह परंपरा देश को साफ तौर पर हिन्दू-मुस्लिम कौमी एकता का मजबूत संदेश दे रही है.
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