MP News: जबलपुर के उत्पादन को बड़ी सौगात मिली है. जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग मिला है. जीआई टैग मिलने से जबलपुरी मटर और सिंघाड़े को वैश्विक बाजार में पहचान मिलेगी. इससे किसानों को उत्पादों का बेहतर दाम मिलेगा और आय बढ़ेगी. जबलपुरी नाम को कानूनी संरक्षण मिलने से अब नकली ब्रांडिंग पर भी रोक लगेगी.
उत्पादों की मार्केटिंग में मिलेगी मदद
मटर के लिए जबलपुर और सिंघाड़े के लिए सिहोरा एशिया की सबसे बड़ी मंडी है. इसके बावजूद यहां के किसानों को अपने उत्पादों की पहचान और सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं. लेकिन अब जीआई टैग मिलने के बाद मटर और सिंघाड़े की मार्केटिंग विस्तृत रूप से हो सकेगी. जिससे किसानों को उनकी फसलों का बेहतर दाम मिलेगा. इसके अलावा क्षेत्र में कई उद्योग यूनिट स्थापित होने की संभावना है. जिससे यहां के लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होंगे.
आसपास के किसानों की आय का मुख्य स्त्रोत मटर और सिंघाड़ा
जबलपुर में बड़ी संख्या में किसान मटर और सिंघाड़े की खेती करते हैं. आसपास के इलाकों मे मटर और सिंघाड़ा यहां के किसानों की आय का मुख्य स्त्रोत है. अब नर्मदा के जल और मिट्टी की मिठास से जुड़े उत्पादों को राष्ट्रीय मान्यता मिलने से विदेशों में भी निर्यात के रास्ते खुल जाएंगे. बता दें ये भारत में पहली बार हुआ है जब मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग मिला हो.
क्या होता है GI टैग?
जीआई(Geographical Indication) टैग किसी भी उत्पादन को एक विशेष प्रकार का बौद्धिक संपदा का अधिकार और प्रमाण देता है. ये उत्पाद की विशेष भौगोलिक स्थिति और सदियों पुरानी परंपरा के आधार पर दिया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य उस भौगोलिक सीमा में उत्पाद को विशेष पहचान दिलाना होता है. जीआई टैग मिलने से एक कानूनी अधिकारी मिल जाता है, जिससे कोई अन्य उस उत्पाद की नकल नहीं कर सकता है. जीआई टैग मिलते ही उत्पाद को विशिष्ट पहचान मिल जाती है. इससे इलाके में उत्पाद के कारीगरों के लिए रोजगार की संभावना बढ़ जाती है.
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