Jabalpur: किसान के लिए धान, गेहूं और मक्के से ज्यादा फायदेमंद दलहन की फसल होती है, क्योंकि दलहन की फसलों का बाजार में दाम अन्य फसलों की अपेक्षा ज्यादा होता है. लेकिन इसके साथ ही किसान को दलहन की फसलों में विशेष ख्याल भी रखना पड़ता है. मौसम, सही समय पर खाद-बीज-पानी देना बहुत जरूरी होता है. यही वजह है कि किसान दलहन की फसलों से दूरी बनाकर रखते हैं और परंपरागत तौर पर गेहूं, धान और मक्का की खेती पर ज्यादा जोर देते हैं. लेकिन दलहन की फसलों की पैदावार को बढ़ाने के लिए अब सरकार विशेष अभियान चला रही है.
देश को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का क्रियान्वयन किया जा रहा है. इस राष्ट्रीय मिशन में मध्यप्रदेश को विशेष रूप से शामिल किया गया है.
मध्यप्रदेश के 8 जिलों का चयन
मध्यप्रदेश में तूअर (अरहर), चना, मसूर एवं उड़द की उच्च उत्पादकता के कारण 8 जिलों जबलपुर, दमोह, कटनी, सागर, उज्जैन, खंडवा, नर्मदापुरम और रायसेन का चयन किया गया है. मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन, किसान पंजीकरण और योजनाओं को खेतों तक पहुंचाने हेतु क्लस्टर स्तर पर सघन आउटरीच अभियान चलाए जा रहे हैं.
4 साल तक MSP पर 100% खरीद की गारंटी
इस मिशन में मुख्य रूप से तूअर, उड़द और मसूर की खेती पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. पंजीकृत किसानों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अगले 4 वर्षों तक इन तीनों फसलों की शत-प्रतिशत खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की गारंटी दी गई है. यह पारदर्शी खरीद प्रक्रिया ‘नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (NCCF) जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा सुनिश्चित की जाएगी.
जबलपुर में डोर-टू-डोर अभियान
इसी क्रम में, NCCF इंदौर शाखा द्वारा जबलपुर जिले में ‘डोर-टू-डोर’ और क्लस्टर आउटरीच अभियान के माध्यम से किसानों से सीधा संपर्क किया जा रहा है. अभियान के तहत NCCF इंदौर की शाखा प्रबंधक गायत्री रेडिया ने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से मुलाकात कर विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी. कलेक्टर द्वारा मिशन के आधिकारिक पोस्टर व बैनर का अनावरण कर जिले में अभियान का शुभारंभ किया गया.सरकार का मानना है कि इस मिशन से किसानों की आय बढ़ेगी और देश दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा.
