Katni News: बहोरीबंद में करोड़ों की लागत से तैयार ICU बना ‘शोपीस’! एक साल से ताला बंद, मरीज हो रहे परेशान

Katni News: नर्सिंग ऑफिसर जानकी हल्दकार का कहना है कि हमारे यहां आईसीयू में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन प्रशिक्षित स्टाफ और टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं होने के कारण इसे संचालित नहीं किया जा पा रहा है. पिछले लगभग एक साल से यही स्थिति बनी हुई है.
katni icu is not working at bahoriband Community Health Center due to medical staff not appointed

कटनी : बहोरीबंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

Katni News: (यश खरे की रिपोर्ट) मध्य प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लाख दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है. कटनी जिले की बहोरीबंद विधानसभा में करोड़ों की लागत से बना आधुनिक आईसीयू पिछले एक साल से सिर्फ इसलिए बंद पड़ा है क्योंकि वहां डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियन की नियुक्ति ही नहीं की गई. नतीजा इलाज के अभाव में मरीजों को 70 किलोमीटर दूर कटनी या जबलपुर ले जाना पड़ता है और कई मामलों में रास्ते में ही जिंदगी दम तोड़ देती है.

ICU एक साल से ताले में कैद

कटनी जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित बहोरीबंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, यहां क्षेत्रीय विधायक प्रणय पांडे द्वारा अपने स्वर्गीय पिता की स्मृति में सर्वसुविधायुक्त आईसीयू का निर्माण कराया गया. भवन तैयार है, अत्याधुनिक मशीनें मौजूद हैं, बेड लगे हैं, ऑक्सीजन की व्यवस्था है लेकिन यह पूरा आईसीयू पिछले एक साल से ताले में कैद है. अंदर हर जरूरी उपकरण अपनी जगह पर रखा हुआ है. मशीनों पर धूल जमने लगी है. जिन सुविधाओं का इस्तेमाल गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए होना चाहिए था, वे अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं. वजह सिर्फ एक है स्टाफ की कमी.

स्टाफ की कमी बनी वजह

नर्सिंग ऑफिसर जानकी हल्दकार का कहना है कि हमारे यहां आईसीयू में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन प्रशिक्षित स्टाफ और टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं होने के कारण इसे संचालित नहीं किया जा पा रहा है. पिछले लगभग एक साल से यही स्थिति बनी हुई है.

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यह तस्वीरें सिर्फ एक बंद आईसीयू की नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य व्यवस्था की हैं जहां संसाधन तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए कर्मचारी नहीं. सवाल यह है कि जब भवन तैयार है, मशीनें तैयार हैं और जरूरत भी है, तो आखिर नियुक्तियां क्यों नहीं हो रही हैं? आखिर जनता को इलाज के लिए कब तक दर-दर भटकना पड़ेगा?

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