Vistaar NEWS

करोड़ों की लागत से बने सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं, आउटसोर्स कर्मचारी-वार्ड बॉय के भरोसे इलाज, एंबुलेंस के लिए नहीं है डीजल

Ward boys and outsourced employees are treating patients at Jaitpur Community Health Centre.

जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड बॉय और आउटसोर्स कर्मचारी मरीजों का इलाज कर रहे हैं.

Input- कैलाश लालवानी

MP News: आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले के जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही है. करोड़ों रुपये की लागत से बनी चमचमाती अस्पताल की बिल्डिंग तो खड़ी है, लेकिन यहां मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टर नदारद हैं. अस्पताल में मरीजों का इलाज डॉक्टर नहीं बल्कि वार्ड बॉय और आउटसोर्स कर्मचारी करते नजर आते हैं. इतना ही नहीं इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर मरीजों को अस्पताल में मौजूद एंबुलेंस भी नसीब नहीं होती क्योंकि एंबुलेस में डीजल नहीं है.

वार्ड बॉय ने इलाज करके जिला अस्पताल रेफर किया

शहडोल जिले के जैतपुर विधानसभा क्षेत्र के जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गाड़ाघाट लांघा निवासी आनंद यादव , जो की सड़क हादसे में घायल हो गए थे, उन्हें इलाज के लिए जैतपुर अस्पताल लाया गया. लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने पर आउट सोर्स कर्मचारी और वार्ड बॉय ने उनका प्राथमिक इलाज कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. परिजन एंबुलेंस की उम्मीद लगाए बैठे रहे, लेकिन डीजल नहीं होने का हवाला देकर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी, आखिरकार घायल को प्राइवेट वाहन से जिला मुख्यालय ले जाना पड़ा.

‘रिकॉर्ड में 3 डॉक्टर्स की ड्यूटी, लेकिन अस्पताल कोई नहीं आता’

अस्पताल में रोजाना करीब 60 मरीजों की ओपीडी होती है. रिकॉर्ड में डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. राधेश्याम समेत तीन डॉक्टर्स की ड्यूटी लगाई जाती है. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉक्टर अस्पताल पहुंचते ही नहीं. ऐसे में इलाज की जिम्मेदारी वार्ड बॉय और आउटसोर्स कर्मचारियों पर आ जाती है.

अस्पताल में आउटसोर्स और स्थायी कर्मचारियों की लंबी फौज मौजूद है, लेकिन डॉक्टरों की गैरमौजूदगी ने पूरी व्यवस्था को भगवान भरोसे छोड़ दिया है. सवाल यह है कि करोड़ों की इमारत और सरकारी संसाधनों के बावजूद आखिर मरीजों को इलाज के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है.

ये भी पढे़ं: Guna News: गुना में दूषित पानी पीने से 15 से ज्यादा बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती, टूटी पाइपलाइनों से हो रही थी वाटर सप्लाई

Exit mobile version