Sehore News: अगर खेती को लाभ का धंधा बनाना है, तो फसल के चक्रीय क्रम को बदलना होगा परंपरागत खेती से उभर कर नई तकनीक अपनानी होगी तभी आप खेती में फायदा उठा सकते हैं. कुछ ऐसा ही अलग कर रहे हैं जबलपुर के किसान. किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और मौसम की अनिश्चितताओं से बचाव के लिए चलाए जा रहे ‘फसल विविधीकरण अभियान’ के सकारात्मक परिणाम अब मैदानी स्तर पर दिखने लगे हैं. विकासखंड सिहोरा के ग्राम कछपुरा गोसलपुर के भ्रमण पर गये अधिकारियों के दल ने ‘नेशनल मिशन ऑन इडीबल ऑयल (तिलहन)’ के अंतर्गत तिल फसल प्रदर्शन का निरीक्षण किया.
तिल की खेती से फसल चक्र में बदलाव
कृषि विस्तार अधिकारी अदिति सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में क्षेत्र के उन्नतशील कृषक राजकिशोर पटेल और लक्ष्मी नारायण पटेल ने पारंपरिक फसलों से हटकर इस सीजन में फसल चक्र में बदलाव किया. किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सहयोग से दोनों किसानों ने 4 एकड़ के रकबे में उच्च गुणवत्ता वाली ‘गुजरात तिल 6’ (जीटी-6) किस्म की बोनी की.
पारंपरिक फसलों से सुरक्षित रही तिल की खेती
किसानों ने बताया कि धान, मक्का और उड़द की पारंपरिक खेती में उन्हें अक्सर कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था. इस बार मानसून की असमान्य वर्षा के बावजूद उनकी तिल की फसल पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा, जो कम लागत और कम पानी में अधिक सुरक्षित साबित हो रही है.
कृषि अधिकारियों ने तिल की फसल का जायजा लिया
कृषि अधिकारियों ने किसानों के खेतों में पहुंचें और तिल की फसल का बारीकी से जायजा लिया. उन्होंने मौके पर मौजूद अन्य किसानों को राजकिशोर पटेल और लक्ष्मी नारायण पटेल की सफलता का उदाहरण देते हुए परंपरागत खेती से हटकर वैकल्पिक और लाभदायक फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया.
तिलहन फसल किसानों के लिए लाभदायक
अधिकारियों ने बताया कि अप्रत्याशित मानसून के दौर में कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन देने वाली तिलहन फसलें किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं. इस सफल प्रदर्शन को देखकर क्षेत्र के अन्य किसान भी अब फसल विविधीकरण की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
