Madhya Pradesh Kisan: जबलपुर: कृषि को अगर लाभ का धंधा बनाना है तो किसान को परंपरागत खेती से उठकर नए प्रयोग करने होंगे अब किसान फसल विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़कर लाखों रुपए कमा रहा है. कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. परंपरागत फसलों के साथ नई फसलों और उन्नत किस्मों को अपनाने से उत्पादन के साथ-साथ किसानों को खेती के नए विकल्प भी मिल रहे हैं. ऐसा ही एक उदाहरण जबलपुर जिले के विकासखंड सिहोरा के ग्राम गांधीग्राम के किसान शनि चौरसिया की खेत में देखने को मिला है.
धान की खेती के लिए जाना जाता है सिहोरा
सिहोरा धान की खेती के लिए जाना जाता है. लेकिन शनि चौरसिया एक तरफा ढलान वाली अपनी कृषि भूमि में मक्का की फसल लिया करते थे. मक्का से अपेक्षा से कम फायदा होने के कारण लगभग तीन वर्ष पहले उन्होंने कुछ अलग करने का निर्णय लिया और किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल मिशन अन्तर्गत ढाई एकड़ में तिल की उन्नत किस्म जीटी-7 की बुवाई की.
समय पर आवश्यक कृषि कार्य किए
बुवाई से लेकर फसल की वृद्धि एवं कटाई तक उन्हें कृषि अधिकारियों द्वारा उन्हें तिल की फसल में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी लगातार दी जाती रही है. खेत में उचित दूरी पर पौधा स्थापना, खरपतवार नियंत्रण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा कीट एवं रोगों की स्थिति पर नियमित निगरानी रखने के संबंध में समझाइश दी गई. किसान ने भी कृषि अधिकारियों की सलाह को अपनाते हुए समय-समय पर आवश्यक कृषि कार्य किए. इससे फसल की स्थिति बेहतर बनी रही और किसान का नई फसल के प्रति विश्वास बढ़ा.
तिल की जीटी-7 किस्म की फसल ने खेत में अच्छी स्थिति प्रदर्शित की. किसान के लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि पहले जिस क्षेत्र में मक्का की खेती की जाती थी, उसी क्षेत्र में तिल जैसी वैकल्पिक फसल लेकर खेती के एक नए विकल्प को आजमाया गया. किसान शनि चौरसिया ने बताया कि जीटी-7 तिल की खेती में कम पानी लगता है. कम बीज में ज्यादा पैदावार होती है, इससे उनकी आय भी बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि कटाई के बाद वे अपने इसी खेत में गेहूं और उसके बाद उड़द की फसल भी ले रहे हैं. शनि चौरसिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि परंपरागत खेती के साथ क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती में नए अवसर बनाए जा सकते हैं और खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.
