आज के दौर में लोग जहां छोटी-छोटी नौकरियां करने के लिए तैयार हैं, तो वहीं कुछ युवा गांव और खेती-किसानी का रुख कर रहे हैं. कई लोग प्राइवेट सेक्टर की नौकरियां छोड़कर स्टार्टअप और ऑर्गेनिक खेती से जुड़ रहे है. युवाओं के बीच मशरूम की खेती, पान की खेती, मोती की खेती, पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस खेती करने का क्रेज बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में एमपी के एक किसान ने बड़े-बड़े व्यापारियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी फसलों से करोड़ों रुपये कमाए हैं.
हरदा के मधुसूदन धाकड़
दरअसल हम मध्य प्रदेश के हरदा जिले के किसान मधुसूदन धाकड़ के बारे में बात कर रहे है. मधुसूदन धाकड़ सिर्फ 10वीं पास हैं लेकिन कमाई के मामले में अच्छे-अच्छे डिग्री धारकों को पीछे छोड़ दिया है. इन्होंने अपनी 200 एकड़ जमीन पर टमाटर, लहसुन, मिर्च, शिमला मिर्च और अदरक जैसी फसलें उगाकर करोड़ों रुपये कमाए और अब खेती करने वाले लोगों के बीच जमकर चर्चा में रहते हैं.
पारंपरिक खेती से लिया अनुभव
मधुसूदन धाकड़ के घर पर हमेशा से खेती-बाड़ी होती आई है. उनके पिता पारंपरिक खेती किया करते थे. इस वजह से छोटी उम्र से ही उन्हें खेती-किसानी का अच्छा अनुभव हो गया था. जमीन के प्रति अपने लगाव और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने की चाहत में वह हमेशा से खेती से जुड़े रहे.
उन्होंने शुरुआत तो पारंपरिक खेती के तरीकों से ही की लेकिन इसके बाद जैसे ही खेती की तकनीकें बदलीं और बाजार की मांग में बदलाव आया, उन्होंने नए तरीके अपनाना शुरू कर दिए. मधुसूदन ने बागवानी की ओर रुख किया और आज वह अपनी 200 एकड़ जमीन में से 130 एकड़ में बागवानी करते हैं.
50 एकड़ में टमाटर की खेती
50 एकड़ में टमाटर की खेती पर 1 लाख रुपये प्रति एकड़ खर्च करके, उन्हें 1000 से 1200 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार मिलती है, जिससे लगभग 3 लाख रुपये प्रति एकड़ की आय होती है। उन्होंने एक साल में 8 करोड़ रुपये के टमाटर बेचे थे, जिसके बाद एमपी के पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल उनका इंटरव्यू लेने पहुंच गए थे। उन्हें ‘एमपी का टोमैटो किंग’ भी कहा जाता है.
वह शिमला मिर्च, लहसुन की भी खेती करते हैं. इतना ही नहीं उनकी खुद की नर्सरी भी है. जहां वह 20 लाख से ज्यादा पौधे उगाते हैं. जानकारी के मुताबिक, आधुनिक तकनीक और सब्जियों की खेती से उनकी सालाना कमाई लगभग ₹5 करोड़ तक पहुंचती है.
