MP News: बालाघाट के लिए इस बार का 80वां स्वतंत्रता दिवस खास होने जा रहा है. नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त होने के बाद जिले में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का आयोजन होगा, जिसमें हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सली भी शामिल होंगे. इसी कड़ी में गुरुवार को बालाघाट पुलिस ने आत्मसमर्पण कर चुके 11 नक्सलियों के साथ उन गांवों का दौरा किया, जो कभी नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं.
आईजी, डीआईजी और एसपी समेत पुलिस अधिकारियों की टीम इन गांवों में पहुंची. दिसंबर 2025 में हथियार छोड़ने वाले 11 नक्सली भी उनके साथ रहे. इनमें बालाघाट के तीन पूर्व नक्सली शामिल थे. राशिमेटा की संगीता को महाराष्ट्र पुलिस और संपत को छत्तीसगढ़ पुलिस की सुरक्षा में कार्यक्रम तक लाया गया, जबकि पालागोंदी के दीपक ने बालाघाट पुलिस के साथ प्रभावित इलाकों का दौरा किया.
बालाघाट के इतिहास में पहली बार कई गांवों में हुआ ध्वजारोहण
पालागोंदी, हर्रानाला, कुंआगोंदी, कोद्दापार, चौरिया और मुंडा जैसे गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया. पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि दक्षिण बैहर क्षेत्र की पाथरी पंचायत के चुक्काटोला में भी पुलिस अधिकारियों ने ध्वजारोहण किया. यह वही गांव है, जिसे कभी 50 लाख रुपये के इनामी नक्सली मिलिंद तेलतुंबड़े ने गोद लिया था.
गांवों में बच्चों को बांटी शिक्षण सामग्री
आईजी ललित शाक्यवार, डीआईजी विनीत जैन और एसपी आदित्य मिश्रा सहित पुलिस अधिकारी पूर्व नक्सलियों के साथ बोदलबहरा, पालागोंदी और हर्राटोला पहुंचे. आईजी शाक्यवार ने यहां तिरंगा फहराया. पुलिस के विद्यांजलि अभियान के तहत विकसित किए गए स्कूलों में बच्चों के लिए शिक्षण सामग्री भी वितरित की गई. कार्यक्रम के बाद पुलिस अधिकारियों और पूर्व नक्सलियों ने ग्रामीणों के साथ बैठकर भोजन किया.
हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने पर जताई खुशी
आत्मसमर्पित नक्सलियों ने कहा कि हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने का फैसला सही रहा. उन्होंने पुलिस अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए. उनका कहना था कि अब वे समाज का हिस्सा बनकर बेहतर और सामान्य जीवन जीना चाहते हैं.
आईजी ललित शाक्यवार ने कहा कि नक्सली हिंसा से मुक्त होने के बाद बालाघाट में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिले के लिए यह दोहरी खुशी का अवसर है, क्योंकि एक तरफ बालाघाट नक्सली प्रभाव से बाहर आया है और दूसरी ओर आत्मसमर्पण कर चुके लोग भी अब देश की आजादी के उत्सव में आम नागरिकों के साथ शामिल होंगे.
ये भी पढे़ं- Khandwa: ओंकारेश्वर में देशभक्ति की गूंज, नर्मदा नदी में 151 नावों से निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा
