MP News: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर टोल वसूली व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में टोल अब केवल उपयोगकर्ता शुल्क नहीं रह गया है, बल्कि यह “जनता से संगठित वसूली और निजी कंपनियों को संरक्षित मुनाफा देने का माध्यम” बन चुका है.
पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई टोल परियोजनाओं की मूल लागत और निर्धारित लाभांश वर्षों पहले वसूल हो चुका है, इसके बावजूद टोल वसूली जारी है. उन्होंने यह भी दावा किया कि कई टोल नाकों को बिना पारदर्शी री-टेंडरिंग या ओपन बिडिंग प्रक्रिया के सीधे आउटसोर्स किया गया है, जिसमें सरकार को केवल 30 प्रतिशत राजस्व हिस्सा मिलता है, जबकि 70 प्रतिशत निजी संचालकों को दिया जाता है.
कानून और नीति का उल्लंघन?
पटवारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 का हवाला देते हुए कहा कि टोल वसूली अनुबंध की शर्तों और अवधि तक ही सीमित होनी चाहिए। BOT (Build-Operate-Transfer) मॉडल के तहत लागत वसूली के बाद सड़क का संचालन अधिकार सरकार को लौटाया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कई परियोजनाओं की अवधि समाप्त होने के बाद भी टोल वसूली जारी है, जो नियमों की भावना के विपरीत है. उन्होंने यह भी कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की पूर्व रिपोर्टों में विभिन्न राज्यों में अतिरिक्त टोल वसूली और अनुबंध उल्लंघन की बात सामने आ चुकी है.
री-टेंडरिंग पर पटवारी ने सरकार से पूछा:
- कितने टोल प्लाजा ऐसे हैं जिनकी मूल अनुबंध अवधि समाप्त हो चुकी है?
- किन टोल नाकों को ई-टेंडरिंग या ओपन बिडिंग के बिना आउटसोर्स किया गया?
- कंपनियों का चयन किस आधार पर हुआ? क्या स्वतंत्र वित्तीय या तकनीकी मूल्यांकन कराया गया?
- उन्होंने कहा कि बिना खुली निविदा प्रक्रिया के राजस्व साझा करना प्रशासनिक अनियमितता और संभावित भ्रष्टाचार का संकेत देता है।
- “30 प्रतिशत सरकार को, 70 प्रतिशत निजी को”
उदाहरण देते हुए पटवारी ने कहा कि यदि किसी टोल प्लाजा से प्रतिदिन औसतन 10 लाख रुपये की वसूली होती है तो मासिक संग्रह लगभग 3 करोड़ रुपये होगा. इसमें से 30% यानी 90 लाख रुपये सरकार को और 70% यानी 2.1 करोड़ रुपये निजी संचालक को मिलते हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में लगभग 90-100 टोल प्लाजा हैं, जिससे मासिक स्तर पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की संभावित राजस्व हानि हो सकती है.
“जनता से तिहरी-चौथी वसूली”
पटवारी ने कहा कि जनता पहले ही वाहन खरीद पर रोड टैक्स, जीएसटी, मोटर व्हीकल टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर भारी कर अदा कर रही है। ऐसे में अनिश्चितकाल तक टोल वसूली “राज्य प्रायोजित दोहन” है।
कांग्रेस की मांगें
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि सरकार सार्वजनिक पोर्टल पर निम्न जानकारी तत्काल अपलोड करे:
- प्रदेश के सभी टोल प्लाजाओं की सूची
- प्रत्येक परियोजना की मूल लागत
- अब तक की कुल वसूली राशि
- अनुबंध समाप्ति तिथि
- आउटसोर्सिंग अनुबंध की प्रति
- सरकार और निजी संचालक के बीच राजस्व साझेदारी अनुपात
पटवारी ने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो वह सभी टोल अनुबंधों की स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराए, राज्य स्तर पर श्वेत पत्र जारी करे और जिन परियोजनाओं की लागत वसूल हो चुकी है, उन्हें टोल मुक्त घोषित करे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के हित में उठाती रहेगी.
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