MP का पहला ‘गाली मुक्त’ गांव, जहां अपशब्द कहने पर देना होता है 500 रुपये का जुर्माना

MP News: नशामुक्ति के बाद अब बोरसर को प्रदेश का पहला 'गाली मुक्त गांव' घोषित किया गया है. यहां अब सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर अपशब्द कहना न केवल वर्जित है, बल्कि ऐसा करने पर सख्त आर्थिक और सामाजिक दंड का भी प्रावधान है.
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बुरहानपुर: बोरसर एमपी का पहला गाली मुक्त गांव

MP News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक छोटा सा गांव बोरसर आज पूरे प्रदेश के लिए चर्चा का विषय और आदर्श बन गया है. लगभग 6 हजार की आबादी वाले इस गांव ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐसी क्रांति शुरू की है, जिसने बड़े-बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है. नशामुक्ति के बाद अब बोरसर को प्रदेश का पहला ‘गाली मुक्त गांव’ घोषित किया गया है. यहां अब सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर अपशब्द कहना न केवल वर्जित है, बल्कि ऐसा करने पर सख्त आर्थिक और सामाजिक दंड का भी प्रावधान है.

कितना जुर्माना लगाया जाता है?

अक्सर देखा जाता है कि छोटे-छोटे विवादों की शुरुआत मामूली गाली-गलौच से होती है, जो बाद में बड़ी हिंसक घटनाओं का रूप ले लेती है. इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच अंतरसिंह, उपसरपंच विनोद शिंदे और मुंबई की फिल्म नगरी से लौटकर आए अभिनेता अश्विन पाटिल ने एक अनूठी योजना तैयार की.

पंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति गांव में मां-बहन की गाली देते हुए पाया जाता है, तो उस पर 500 रुपये का नकद जुर्माना लगाया जाएगा. यदि कोई व्यक्ति जुर्माना भरने में असमर्थ है, तो उसे सजा के तौर पर पूरे गांव में एक घंटे तक झाड़ू लगाकर साफ-सफाई करनी होगी. नियम की कड़ाई का आलम यह है कि गांव में 20 पंचों की एक विशेष टीम बनाई गई है, जो हर वार्ड में पैनी नजर रखती है.

अश्विन पाटिल की सोच ने बदली गांव की सूरत

इस बदलाव के पीछे फिल्म अभिनेता और समाजसेवी अश्विन पाटिल का बड़ा योगदान है. 10 साल मुंबई में बिताने के बाद जब वे अपने गांव लौटे, तो उन्होंने महसूस किया कि बच्चों और युवाओं में गाली-गलौच की बढ़ती आदत उनके भविष्य को प्रभावित कर रही है. अश्विन ने पंचायत और बुजुर्गों के साथ बैठक कर ‘संस्कार नवाचार’ की नींव रखी. दीवारों पर स्लोगन लिखकर लोगों को जागरूक किया गया और देखते ही देखते यह मुहीम एक जन-आंदोलन बन गई.

स्मार्ट विलेज की ओर अग्रसर

बोरसर गांव केवल गाली मुक्त होने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में विकसित किया जा रहा है.

डिजिटल क्रांति: गांव के चार प्रमुख स्थानों पर फ्री वाई-फाई हॉटस्पॉट लगाए गए हैं, जिससे हर ग्रामीण इंटरनेट की दुनिया से जुड़ गया है.

पुस्तकालय: बच्चों और युवाओं को शिक्षित करने के लिए एक आधुनिक लाइब्रेरी खोली गई है, जहां धार्मिक, आध्यात्मिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों का भंडार है.

हरित क्रांति: हर घर हरियाली अभियान के तहत ग्रामीणों को मुफ्त पौधे वितरित किए गए हैं ताकि गांव को प्रदूषण मुक्त और सुंदर बनाया जा सके.

सेवाभाव कक्ष: पंचायत भवन में एक विशेष कक्ष बनाया गया है, जहां दानदाताओं द्वारा दी गई सामग्री रखी जाती है. यहां से कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के अपनी जरूरत का सामान मुफ्त ले सकता है.

अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा बना बोरसर

सरपंच अंतरसिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि लोगों की सोच को ‘अपग्रेड’ करना है. आज बोरसर के बच्चे गाली की जगह संस्कार बोल रहे हैं. गांव में जगह-जगह लगे नोटिस बोर्ड बाहर से आने वालों को भी शालीनता का पाठ पढ़ा रहे हैं.

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बोरसर की यह ‘संस्कारों की प्रयोगशाला’ साबित करती है कि यदि नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो और ग्रामीणों का सहयोग मिले, तो जमीनी स्तर पर बड़े सामाजिक बदलाव संभव हैं. आज यह गांव न केवल बुरहानपुर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गौरव और अनुशासन का हॉटस्पॉट बन चुका है.

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