MP News: मध्य प्रदेश में बिजली का टैरिफ बढ़ाने की नहीं, घटाने की जरूरत है. मप्र विद्युत नियामक आयोग विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधान तथा स्वयं द्वारा अधिसूचित रेग्युलेशन व विद्युत कम्पनियों को समय-समय पर दिए गए निर्देशों का गंभीरतापूर्वक पालन करता है, तो मप्र में बिजली के टैरिफ को पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और गुजरात के समकक्ष लाया जा सकता है. आयोग में दायर आपत्ति और सुझाव में यह दावा किया गया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मप्र में बिजली का टैरिफ बढ़ाए जाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के लिए दावे-आपत्तियां बुलाई जा रही हैं. फरवरी में आपत्तियों पर सुनवाई होगी. सुनवाई के बाद 1 अप्रैल से प्रदेश में बिजली का नया टैरिफ लागू हो जाएगा. इस पर बिजली कंपनियों ने टैरिफ 10.19 फीसदी तक बढ़ाए जाने की मांग की है. बिजली कंपनियों 6044 करोड़ का घाटा बताते हुए याचिका दायर की है.
इधर, बिजली के जानकार राजेंद्र अग्रवाल ने मप्र विद्युत विनियामक आयोग में दायर आपत्ति और सुझाव में दावा किया है कि वास्तविक राजस्व आवश्यकता में 6044 करोड़ घाटे की अपेक्षा 9125 करोड़ का राजस्व सरप्लस हो सकता है. इससे बिजली का टैरिफ बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. प्रदेश की बिजली कंपनियों ने दायर याचिका में बताया है कि वर्तमान टैरिफ 59 हजार 331 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो रहा है, जबकि बिजली कंपनियों को साल 2026-27 में 65 हजार 374 करोड़ के राजस्व की जरूरत है.
कृषि उपभोक्ताओं की बिजली होगी ज्यादा महंगी
बिजली कंपनियों की मांग के मुताबिक अगर टैरिफ में इजाफा होता है, तो बिजली पिछली बार से करीब तीन गुना महंगी हो जाएगी. पिछली बार घरेलू टैरिफ में प्रति यूनिट 18 पैसे का इजाफा हुआ था. इस बार प्रति यूनिट 51 पैसे तक इजाफा करने की मांग कंपनियों ने रखी है. प्रस्तावित टैरिफ के मुताबिक इजाफा होने पर कृषि उपभोक्ताओं के टैरिफ में ज्यादा इजाफा होगा.
पिछली बार 4107.18 करोड़ रुपए का घाटा
बिजली कंपनियों ने पिछली बार 4107.18 करोड़ का घाटा बताते हुए बिजली के मौजूदा टैरिफ में 7.52 फीसदी इजाफे की मांग की थी. इसके बदले आयोग ने 3.46 फीसदी इजाफा किया था. बिजली कंपनियों ने 2025-26 के लिए 58744.15 करोड़ के राजस्व की आवश्यकता बताई थी. कंपनी के मुताबिक प्रचलित दरों पर 54636 करोड़ का राजस्व मिलेगा. इससे बिजली कंपनियों को 4107.18 करोड़ का नुकसान होगा. इसकी भरपाई के लिए कंपनियों ने टैरिफ बढ़ाने की मांग की थी. इस बार कंपनियों ने पिछली बार से ज्यादा घाटा बताया है. ऐसे में इस बार टैरिफ में पिछले साल से ज्यादा इजाफा हो सकता है.
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इस तरह महंगी होगी बिजली
घरेलू बिजली 9.28%, गैर घरेलू 8.67%, सार्वजनिक जल एवं स्ट्रीट लाइट 11.89 प्रतिशत, औद्योगिक 8.8 प्रतिशत, कृषि एवं सहायक उद्योग 13.82%, ई-वाहन और ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन 9.6 फीसदी, रेलवे ट्रैक्शन 5.55%, कोयला खदानें 6.3 प्रतिशत, औद्योगिक और गैर औद्योगिक बिजली में 6 फीसदी महंगी हो जाएगी.
