MP GST Collection: मध्य प्रदेश सरकार के खजाने में इस वर्ष करीब तीन हजार करोड़ रुपए कम आएंगे. वाणिज्यिक कर विभाग की लाख कोशिश के बाद भी यह क्षति कम नहीं हो पा रही है. पहली बार ऐसा हुआ है कि जीएसटी के रेवन्यू में दिसंबर तक में ढाई से तीन फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है. मार्च तक में भी यह क्षतिपूर्ति की संभावना फिलहाल नहीं है. जबकि आबकारी में करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पंजीयन में भी 11.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
एमपी में इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार के गुड्स एंड सर्विस टैक्स (एसजीएसटी) में दिसंबर तक में करीब ढाई हजार करोड़ रुपए की क्षति संभावित है. यह क्षति हालांकि केंद्र सरकार के जीएसटी की दरों में कमी की वजह से हो रहा है लेकिन मप्र सरकार के खजाने में जीएसटी के साथ ही वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), पंजीयन में भी काफी कम इजाफा हुआ है.
वैट में करीब साढ़े तीन फीसदी का इजाफा
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25,250 करोड़ आए एसजीएसटी में पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 26 हजार करोड़ रुपए आए थे मगर वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक में महज 25.50 करोड़ रुपए ही आए है. जबकि इस समयावधि तक में करीब 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया था. पिछले एक दशक में पहली बार ऐसा हो रहा है कि लक्ष्य तो दूर उससे पिछले वित्तीय वर्ष के बराबर भी रेवन्यू नहीं मिल पा रहा है.
अभी तक आ चुके केंद्र से 14 हजार करोड़
राज्य सरकार पेट्रोल, डीजल, रसोईगैस आदि पर वैट वसूलती है. इससे सरकार को प्रति वर्ष अनुमानित 14 हजार करोड़ रुपए मिलते हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 13950 करोड़ रुपए मिले थे. जीएसटी की दरों में कमी का असर यहां भी देखने को मिल रहा है. वित्तीय वर्ष के चौथे तिमाही में यानी अभी तक में करीब 14 हजार करोड़ रुपए आ चुके हैं. जबकि अनुमानित 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया था.
आबकारी में 17 फीसदी की बढ़ोतरी
आबकारी यानी शराब पर टैक्स से सरकार को पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 15,260 करोड़ रुपए मिले थे. इस वर्ष इसमें करीब 16,500 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिलने की संभावना थी, किंतु अभी तक में महज 12,350 करोड़ रुपए ही मिले हैं. दिसंबर 2025 तक में यह राशि महज 10, 550 करोड़ रुपए ही था.
इसी तरह पंजीयन विभाग में भले ही 11.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है मगर लक्ष्य के मुताबिक इसमें राशि नहीं मिल पा रही है. पिछले वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक में 7,750 करोड़ रुपए मिले थे. जबकि इस वर्ष दिसंबर तक में 8,660 करोड़ रुपए मिल चुके हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 11,350 करोड़ रुपए मिले थे. इस वर्ष दो महीने में यह राशि मिल पाएगी या नहीं, इसमें संदेह है.
