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‘स्टाइपेंड वृद्धि पर 15 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन’, मध्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का ऐलान

Madhya Pradesh Junior Doctors Association announces state-wide agitation

मध्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान.

MP News: मध्यप्रदेश के इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के हितों की लड़ाई के लिए MP JDA (मध्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन) अब एक संगठित, सशक्त और एकजुट मंच के रूप में सामने आया है. MP JDA ने स्पष्ट किया है कि वह अब प्रदेश के प्रत्येक इंटर्न, रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट की आवाज बनेगा.

स्टाइपेंड वृद्धि का लंबित मामला: अंतिम चेतावनी

MP JDA ने राज्य सरकार के समक्ष इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट एवं सीनियर रेजिडेंट के वार्षिक स्टाइपेंड इन्क्रीमेंट का गंभीर मुद्दा दोबारा उठाया है. यह वृद्धि शासन आदेश क्रमांक F-2-67/2015/1-55 के तहत 1 अप्रैल 2025 से लागू की जानी थी, जिसे सरकार स्वयं स्वीकृति दे चुकी है, लेकिन आज तक इसे अमल में नहीं लाया गया.

संघ का कहना है कि पिछले कई महीनों से संबंधित अधिकारियों से लगातार चर्चा की गई, मौखिक आश्वासन भी मिले, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ.

15 दिन का अल्टीमेटम

MP JDA ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है. सरकार को 15 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया जाता है. यदि तय समय में निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे मध्यप्रदेश में सामूहिक आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा. यह मांग प्रदेश के हर रेजिडेंट डॉक्टर से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है.

UG–PG डॉक्टरों के लिए स्वास्थ्य बीमा की मांग

MP JDA ने एक और मानवीय और नैतिक मांग सरकार और मीडिया के सामने रखी है. प्रदेश के प्रत्येक UG एवं PG रेजिडेंट डॉक्टर के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा (Individual Health Insurance) अनिवार्य किया जाए.

मध्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कहा कि जो डॉक्टर दिन-रात अस्पतालों में सेवा देते हैं. हजारों जिंदगियां बचाते हैं. अत्यधिक जोखिम और मानसिक-शारीरिक दबाव में काम करते हैं. उनके स्वयं के स्वास्थ्य के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं होना विडंबनापूर्ण है. जब लगभग हर पेशे में कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा मिलता है, तो स्वास्थ्य सेवा देने वाले डॉक्टर इससे वंचित क्यों हैं?

सरकार के सामने खड़े सवाल

MP JDA ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी.

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