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शौक से शुरू हुआ खेल, ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसा ‘कैफे गैंग, आखिर सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी

Mauganj Honey trap Case

मऊंगज हनीट्रैप के आरोपी पहुंचे सलाखों के पीछे

Mauganj News: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से सामने आया ‘हनी ट्रैप कांड’ इन दिनों पूरे प्रदेश में सनसनी बना हुआ है. दिखावे की जिंदगी, सोशल मीडिया पर फेमस होने की चाहत और जल्दी पैसा कमाने की लालसा ने एक युवती को ऐसे अपराध के रास्ते पर ला खड़ा किया, जिसका अंत आखिरकार जेल की सलाखों के पीछे हुआ. यह मामला सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा चेतावनी संदेश भी है.

पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई, वह बेहद चौंकाने वाली है. आरोपी युवती ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर पहले किराए का कमरा लिया और फिर “चाय कैफे” के नाम पर एक जाल बिछाया. यह कैफे बाहर से आम दुकान जैसा दिखता था, जहां लोग सुकून के लिए चाय पीने आते थे, लेकिन अंदर ही अंदर यहां एक खतरनाक साजिश चल रही थी. चुनिंदा ग्राहकों को टारगेट किया जाता, उनसे दोस्ताना व्यवहार कर भरोसा जीता जाता और फिर उन्हें एकांत में ले जाकर गुप्त कैमरों से आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए जाते.

ब्लैकमेलिंग कर ऐंठते 5 लाख तक

इसके बाद शुरू होता था असली खेल ब्लैकमेलिंग का. वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़ितों से लाखों रुपये की मांग की जाती थी. बताया जा रहा है कि इस “चाय” की कीमत 5 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी, जो असल में ब्लैकमेलिंग की रकम थी. बदनामी के डर से कई लोग चुपचाप पैसे दे देते, जिससे यह गिरोह लगातार सक्रिय बना रहा.

पूर्व जनपद उपाध्यक्ष के वीडियो वायरल होने पर खुली पोल

मामले ने तब तूल पकड़ा जब हनुमना के पूर्व जनपद उपाध्यक्ष विनोद मिश्रा का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. आरोप है कि उनसे भी मोटी रकम की मांग की गई थी, लेकिन पैसे न मिलने पर वीडियो लीक कर दिया गया. इसके बाद पुलिस हरकत में आई और साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर उड़ीसा के सुंदरगढ़ से उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

कई महीनों से सक्रिय था गिरोह

जांच में सामने आया कि यह गैंग पिछले 8-9 महीनों से सक्रिय था. जुलाई 2025 में बराव रोड पर किराए से रहने के बाद दिसंबर में दुवगवा कुर्मियांन गांव में सरकारी स्कूल के पास कैफे खोला गया. स्थानीय विरोध के बावजूद आरोपी अपनी जगह बदलते रहे और बस स्टैंड व पुलिस कंट्रोल रूम के आसपास भी सक्रिय रहे. पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से कई संदिग्ध वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग मिली हैं, जिससे अंदेशा है कि कई और लोग इस जाल में फंसे हो सकते हैं.

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पुलिस ने आरोपियों को भेजा जेल

फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. यह घटना साफ बताती है कि सोशल मीडिया और दिखावे की चमक के पीछे छिपा अंधेरा कितना खतरनाक हो सकता है. मऊगंज का यह हनी ट्रैप कांड समाज को एक सख्त संदेश देता है. अनजान लोगों पर भरोसा और निजी पलों में लापरवाही, दोनों ही भारी पड़ सकते हैं. सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है.

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