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मऊगंज में सड़क के निर्माण में धांधली! अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप, घटिया निर्माण पर ग्रामीणों में आक्रोश

Mauganj Corruption in Road Construction

मऊगंज में सड़क निर्माण में धांधली

MP News: मऊगंज जिले के हनुमना जनपद अंतर्गत ग्राम गनिगवा में बन रही करोड़ों रुपए की PWD सड़क अब सवालों के घेरे में है. निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं और खुलेआम नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि यह सड़क बनने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है.

बिना सूचना बोर्ड के निर्माण, पारदर्शिता पर सवाल?

निर्माण स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगाया गया है और न ही निर्माण एजेंसी, स्वीकृत राशि या कार्य की लंबाई-चौड़ाई का कोई विवरण उपलब्ध है. यह लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से जानकारी छिपाने का प्रयास प्रतीत होता है, जो बड़े घोटाले की आशंका को जन्म देता है.

अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप!

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर PWD अधिकारी राजेश श्रीवास्तव और ठेकेदार अर्जुन सिंह पर मिलीभगत का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि सड़क निर्माण में तय मानकों का कहीं पालन नहीं किया जा रहा और घटिया सामग्री का उपयोग कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है.

मानकों की खुली अनदेखी, गुणवत्ता से समझौता

निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पहले 1 मीटर मिट्टी डालकर उसे मुरम से मजबूत किया जाना था, साथ ही पानी का छिड़काव और रोलर से दबाव देना अनिवार्य था. लेकिन मौके पर न पानी डाला जा रहा है, न रोलर चलाया जा रहा है और न ही आवश्यक सामग्री जैसे CRMS का उपयोग किया जा रहा है. इसके बजाय मिट्टी मिश्रित गिट्टी डालकर सड़क बनाई जा रही है.

सच्चाई छुपाने के लिए पहले बनाए गए शोल्डर

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सड़क की असली मोटाई छुपाने के लिए पहले ही साइड शोल्डर तैयार कर दिए गए हैं. जानकारी के अनुसार सड़क की बेस मोटाई महज 1.5 इंच रखी जा रही है, जो मानकों के बिल्कुल विपरीत है.

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा. इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि पूरे मामले में कहीं न कहीं उच्च स्तर पर संरक्षण प्राप्त है.

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सड़क टिकाऊ होने पर सवाल

गांव के लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही, तो सड़क कुछ ही महीनों में उखड़ जाएगी और करोड़ों रुपए बर्बाद हो जाएंगे. जनता का सवाल साफ है, आखिर इस भ्रष्टाचार पर लगाम कब लगेगी?

अब निगाहें प्रशासन पर

यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता का भी है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा.

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