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Mauganj News: मऊगंज में ममता की कुर्बानी पर सिस्टम की बेरुखी भारी, बेटे को बचाने में मां ने गंवाई जान, 100 मीटर तक घसीटता रहा मौत का हाइवा

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मऊगंज हादसा

Mauganj News: मऊगंज जिले के जमुहरा गांव से सामने आई घटना ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है. यहां एक मां ने अपने दो साल के मासूम बेटे को मौत के मुंह से बचाने के लिए खुद की जान कुर्बान कर दी, लेकिन उससे भी ज्यादा शर्मनाक तस्वीर उस सिस्टम की रही, जो वक्त रहते मदद पहुंचाने में नाकाम साबित हुआ. आरोप है कि हादसे के बाद महिला करीब डेढ़ घंटे तक सड़क पर तड़पती रही और पुलिस समय पर नहीं पहुंची.

कैसे हुआ हादसा?

बताया जा रहा है कि ओवरलोड डस्ट से भरा तेज रफ्तार हाइवा जमुहरा गांव के पास अनियंत्रित होकर सड़क किनारे चल रही किरण कोल को अपनी चपेट में ले लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के वक्त महिला अपने दो साल के बेटे के साथ थी. मौत को सामने देखकर मां ने पहले अपने मासूम को बचाया और उसे दूर फेंक दिया, जिससे बच्चे की जान बच गई, लेकिन खुद हाइवा की चपेट में आ गई.

100 मीटर तक हाइवा घसीटता रहा

हादसा इतना भयावह था कि हाइवा महिला को करीब 100 मीटर तक घसीटता रहा. ग्रामीण लगातार चिल्लाते रहे, लेकिन ड्राइवर ने वाहन नहीं रोका. आखिरकार लोगों ने पत्थर मारकर हाइवा का कांच तोड़ा, तब जाकर मौत का यह तांडव रुका. तब तक किरण कोल गंभीर रूप से घायल हो चुकी थी.

पुलिस और एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची

ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद भी पुलिस और एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची. मऊगंज से घटनास्थल की दूरी लगभग 10 किलोमीटर बताई जा रही है, लेकिन पुलिस को मौके तक पहुंचने में करीब 90 मिनट लग गए. इस दौरान महिला सड़क पर तड़पती रही. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज मिल जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी.

ग्रामीणों ने चक्काजाम किया

घटना के बाद जमुहरा गांव में भारी आक्रोश फैल गया. ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर घंटों तक चक्काजाम किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. गुस्साए लोगों ने ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा.

बच्चा बोलने में असमर्थ

वहीं हादसे में घायल मासूम बच्चे को गंभीर सदमे की हालत में रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर किया गया है. बताया जा रहा है कि बच्चा अभी भी डरा-सहमा है और ठीक से कुछ बोल नहीं पा रहा.

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यह घटना प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रही

यह घटना एक बार फिर मऊगंज जिले में बेलगाम ओवरलोड वाहनों के आतंक और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रही है. सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर कब तक सड़कों पर ऐसे ‘चलते-फिरते यमराज’ मौत बांटते रहेंगे? और उस देरी का जिम्मेदार कौन होगा, जिसने एक तड़पती मां को जिंदगी की बजाय मौत के करीब धकेल दिया.

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