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MP News: ‘निगम के अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं’, बैठक में महापौर और MIC मेंबर ने लगाए गंभीर आरोप

Ruckus over allegations against Bhopal Municipal Council officials of not picking up calls.

भोपाल निगम परिषद के अधिकारियों पर कॉल ना उठाने के आरोप को लेकर हंगामा.

MP News: आज भोपाल निगम परिषद की बैठक में MIC मेंबर रविंद्र यति ने निगम के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. रविंद्र यति ने कहा कि निगम के अधिकारी-कर्मचारी तय एजेंडा और MIC के निर्णय में छेड़छाड़ और फेरबदल करते हैं. एजेंडा में कुछ और लिखा रहता है. MIC के निर्णय में कुछ और लिखा रहता है. डॉक्यूमेंट में फेर बदल किया जा रहा है, MIC निर्णय कुछ और लेती है और डॉक्यूमेंट में प्रिंट कुछ और किया जाता है.

‘बाबू पद्धति की सजा हम सबको मिल रही’

MIC मेंबर ने कहा कि बाबू पद्धति की सजा हम सबको मिल रही है. आदमपुर खंती के एजेंडा के प्रस्ताव में MIC के निर्णय में फेरबदल किया गया. निगम के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को चौराहे का नेता बना दिया है और बाकी निर्णय खुद ले रहे हैं. जब मामला फंस जाता है तो MIC और परिषद पर डाल देते हैं.

अधिकारियों और कर्मचारियों की हरकतों की वजह से ही हाल ही में वित्त विभाग में लोकायुक्त का छापा पड़ा. एमआईसी मेंबर ने MIC के निर्णय में डॉक्यूमेंट से फेरबदल करने वाले कर्मचारी और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, इसके बाद निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने तत्काल निगम आयुक्त को दिए जांच के आदेश दिए हैं.

निगम अधिकारी BJP पार्षद और MIC सदस्यों का फोन नहीं उठाते

निगम परिषद की बैठक में बीजेपी पार्षदों ने भी निगम अधिकारियों की शिकायत की. इसके बाद इस मामले में भी आसंदी से अध्यक्ष ने निगम आयुक्त को निर्देश दिए हैं. ऐसे अधिकारीयों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश हुए हैं. निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि जो अधिकारी-कर्मचारी पार्षद और MIC मेंबर का फोन नहीं उठाते हैं, इनको हटाया जाए. यह लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

मामले में महापौर का भी सदन में तल्ख तेवर देखने को मिला. मामले में महापौर ने कहा कि जिसने एजेंडा को टाइप करवाया है, उसको सामने खड़ा किया जाए. इस बीच बीजेपी के पार्षदों ने कहा कि सदन में अधिकारियों की तानाशाही नहीं चलेगी.

फैसले लेने के लिए निगम अध्यक्ष ने आयुक्त को किया अधिकृत

महापौर ने कहा कि एजेंडा में लिखा है कि MIC ने टेंडर करने के प्रस्ताव की अनुशंसा की और संकल्प लिया. जबकि ऐसा निर्णय MIC ने लिया ही नहीं है. MIC ने प्रस्ताव को परिषद की बैठक में लाने का निर्णय लिया था. इसके बाद मामले में निर्णय लेने के लिए निगम अध्यक्ष ने आयुक्त को अधिकृत किया. आयुक्त ने मामले में जवाब देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए भेजा जाएगा. MIC के निर्णय के विरुद्ध एजेंडा में लाना नियम के खिलाफ है. इसलिए इसे पुनर्विचार के लिए भेजा जाएगा.

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