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MP News: कारम डैम मामले में सीएम मोहन यादव का एक्शन, 6 अधिकारियों को नोटिस, 2022 में टूटा था बांध

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कारम डैम मामले में सीएम मोहन यादव का एक्शन

MP News: तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान की सरकार में कारम डैम टूटने के मामले में मोहन सरकार ने फाइल खोल दी है. साल 2022 में जिम्मेदार जल संसाधन के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया गया है. अतिरिक्त मुख्य सचिव ने तत्कालीन मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, तत्कालीन एसडीओ और छह अधिकारियों को तलब किया है. 17 फरवरी को अधिकारियों को मौजूद रहकर जवाब देना होगा. अगर अधिकारी जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ एक पक्षीय कार्रवाई की जाएगी.

किन अधिकारियों को मिला नोटिस?

जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि तत्कालीन मुख्य अभियंता की घटोले रिटायर्ड, रिटायर्ड तत्कालीन अधीक्षण यंत्री पी जोशी, तत्कालीन कार्यपालन नियंत्रित बीएल निनमा, तत्कालीन अनुभागीय अधिकारी विकास अहमद सिद्दीकी तत्कालीन, उप यंत्री विजय कुमार और तत्कालीन उप यंत्री दशावंता सिसोदिया को नोटिस जारी किया है. विभागीय जांच के संबंध में अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव के ऑफिस में सुनवाई का समय दिया गया है.

17 फरवरी को अधिकारियों को मौजूद रहकर जवाब देना होगा. जांच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई होगी. धार जिले में साल 2022 में कारण डैम क्षतिग्रस्त होने के मामले में इन सभी अधिकारियों को दोषी पाया गया था. तत्कालीन सरकार ने सभी को तत्काल निलंबित कर दिया था. उनके निलंबन की प्रक्रिया के साथ-साथ दोष तय करने के लिए सुनवाई का समय दिया गया है.

100 करोड़ का नुकसान, कंपनी ब्लैकलिस्टेड

बारिश के समय डैम टूटने के मामले पर सरकार को 100 करोड रुपए का नुकसान हुआ था. इसके बाद हालांकि सरकार ने दो कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था लेकिन इसके बाद फिर से ब्लैक लिस्ट कंपनी की डमी मदर कंपनी को काम दिया गया. हालांकि इस मामले में भी जांच जारी है. 4 साल बीतने के बाद भी डैम का निर्माण पूरी तरीके से पूरा नहीं हुआ है. यह पूरी योजना भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गई हैं.

डैम टूटने का असर, गांव बहे

साल 2022 में बांध के टूटने से किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था किसने की खड़ी फसल पूरी तरीके से डैम की चपेट पर आ गई. पानी की तेज रफ्तार उनकी फसल को बहा ले गई. हालांकि बाद में आदिवासी किसान परिवारों को सरकार ने मुआवजा के तौर पर राशि दी थी. हालांकि मुआवजा राशि के लोग मामले में किसानों ने नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा की फसल के साथ-साथ पूरी खेत की मिट्टी तक रह चुकी है. उसके बाद भी मुआवजा सरकार की तरफ से ऊट के मुंह में जीरा के बराबर है.

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ऐसे शुरू हुई परियोजना

10 अगस्त 2018 में कारम बांध निर्माण की स्वीकृति मिली. शुरुआती 36 महीने में बनाने का लक्ष्य था. साल 2021 में तैयार होना था. 12 अगस्त 2022 तकनीकी कमियों के चलते बांध की दीवार में रिसाव शुरू हो गया था. फूटने की आशंका में प्रशासन ने बांध की पाल को एक साइड से तोड़कर पानी निकालने का रास्ता बनाया. साल 2022, 2023 में काम बंद रहा. 2024 में फिर चालू हुआ. अब 2026 में पूरा होने का दावा किया जा रहा है.

304 करोड़ प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी. 99.86 करोड़ बांध पर खर्च हुआ.44.53 एमसीएम जल ग्रहण क्षमता वाला डैम बनना है. 342.50 वर्ग किमी कैचमेंट एरिया तय की गई है. 52 मीटर ऊंचाई 584 मीटर लंबाई है.
02 नहरें भी बनाई जानी हैं.

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