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MP News: एमपी में पुलों की सेहत का डिजिटल ‘हेल्थ कार्ड’, मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट से बनेगा पूरा डेटाबेस

MP bridge digital survey

एमपी में ब्रिजों का डिजिटल सर्वे होगा

MP News: मध्य प्रदेश में पुलों की सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) ने मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट के जरिए राज्यभर के पुलों का डिजिटल सर्वे कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए परामर्श सेवाओं की निविदाएं जारी की गई हैं, जिनके माध्यम से पुलों की इन्वेंटरी स्थिति सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी.

मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट कैसे काम करेगा?

निविदा दस्तावेजों के अनुसार, सभी श्रेणी की सड़कों पर बने बड़े पुल, छोटे पुल, फ्लायओवर, पुलिया और स्लैब नालियों का डेटा एकत्र किया जाएगा. आधुनिक उपकरणों से संरचनाओं की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक आकलन होगा. इससे यह तय किया जा सकेगा कि किन पुलों को रेट्रोफिटिंग, सुदृढ़ीकरण या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है. यह कार्य दो पैकेज में कराया जाएगा, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 72.02 लाख रुपये है.

वहीं धरोहर राशि 72 हजार रुपये और निविदा मूल्य 10 हजार रुपये तय किया गया है. दोनों पैकेजों के लिए कार्य पूर्ण करने की अवधि छह माह निर्धारित की गई है, जिसमें वर्षाकाल भी शामिल रहेगा.

पुलों का डिजिटल सर्वे और डीपीआर दर्ज होगा

मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट के माध्यम से प्रत्येक संरचना का तकनीकी डेटा लोड क्षमता, क्रैकिंग, जॉइंट की स्थिति, बीयरिंग, डेक स्लैब और सब-स्ट्रक्चर की मजबूती डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा. इसके आधार पर डीपीआर तैयार होगी, जिससे भविष्य की मरम्मत और उन्नयन योजनाएं प्राथमिकता के आधार पर बनाई जा सकें. अधिकारियों का कहना है कि इससे पुलों की वास्तविक स्थिति का सटीक डेटाबेस तैयार होगा और आकस्मिक दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी.

सड़क और जंक्शन सुधार के बड़े प्रोजेक्ट

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संरचनात्मक स्वास्थ्य मूल्यांकन पर जोर

खराब श्रेणी में चिह्नित पुलों की मरम्मत और संरचनात्मक स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिए भी अलग से निविदाएं जारी की गई हैं. इन कार्यों में विस्तृत तकनीकी जांच, मरम्मत योजना और इंजीनियरिंग निदान शामिल होगा. परियोजनाओं की अवधि 3 से 12 माह तक तय की गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल सड़क अवसंरचना प्रबंधन में पारदर्शिता और वैज्ञानिक योजना का आधार बनेगी. डिजिटल सर्वे के जरिए समय रहते कमजोर संरचनाओं की पहचान संभव होगी, जिससे न केवल रखरखाव लागत कम होगी बल्कि सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी.

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