MP News: राज्य सरकार मैदानी अफसरों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करवा रही है और उसी के आधार पर बड़े पैमाने पर तबादलों की तैयारी है. सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र समाप्त होने के बाद मंत्रालय से लेकर जिलों तक व्यापक फेरबदल होगा. अनुमान है कि 12 से 20 प्रतिशत जिलों के कलेक्टर बदले जाएंगे.
यह पूरी कवायद केंद्र और राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी/ग्रामीण), परिवार कल्याण कार्यक्रम और अन्य जनकल्याण अभियानों की प्रगति के आधार पर की जा रही है. जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर पाया गया है, वहां प्रशासनिक बदलाव लगभग तय माने जा रहे हैं.
सीएम-सीएस स्तर पर आकलन
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा के बाद रिपोर्ट तैयार हुई है. मुख्य सचिव अनुराग जैन दो बार कामकाज का बहुस्तरीय आकलन करा चुके हैं. सामान्य प्रशासन विभाग ने जिलावार परफॉर्मेंस रिपोर्ट संकलित कर ली है. पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद तबादलों की योजना थी, लेकिन अब संकेत हैं कि 6 मार्च के बाद बड़ी सूची जारी की जा सकती है.
इन जिलों से कई शिकायतें आई
सरकार जिन पैमानों पर समीक्षा कर रही है उनमें योजनाओं की जमीनी प्रगति, नामांतरण-बंटवारे के लंबित प्रकरण, खाद वितरण, स्कूलों में घटता पंजीयन, अवैध खनन, अतिक्रमण, सड़क दुर्घटनाएं और जनप्रतिनिधियों से तालमेल जैसे बिंदु शामिल हैं. रबी-खरीफ सीजन में रीवा, भिंड, दतिया, नर्मदापुरम और रायसेन जैसे जिलों में खाद वितरण को लेकर शिकायतें रहीं.
नर्मदा और चंबल अंचल में अवैध खनन तथा नदी तटों को नुकसान की शिकायतें भी उच्च स्तर पर पहुंची हैं. केंद्र की ओर से योजनाओं की सीधी मॉनिटरिंग यहां तक कि पीएम स्तर की समीक्षा के कारण राज्य सरकार पर भी बेहतर परिणाम देने का दबाव है.
सचिव स्तर पर भी बदलाव
13 फरवरी की आधी रात को स्वास्थ्य, कृषि और आबकारी सहित 11 वरिष्ठ अफसर बदले गए थे. अब अगली सूची में सचिव और अपर कलेक्टर स्तर तक फेरबदल संभव है. जिन अधिकारियों को ढाई वर्ष से अधिक समय एक ही स्थान पर हो चुका है, वे भी दायरे में हैं. प्रदेश में 44 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिससे संवर्ग प्रबंधन पर असर पड़ा है.
अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर पर कमी के कारण कई अधिकारियों को दो-तीन विभागों का प्रभार संभालना पड़ रहा है. कुल मिलाकर, बजट सत्र के बाद सरकार “एक तबादले में कई संदेश” देने की तैयारी में है साफ संकेत कि योजनाओं की रफ्तार और जमीनी नतीजे ही अब अफसरों की तैनाती तय करेंगे.
