MP News: मध्यप्रदेश की वित्तीय सेहत को लेकर सियासत तेज हो गई है. मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी घटाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि नई कर-वितरण नीति से मध्यप्रदेश को अगले पांच वर्षों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये का संभावित राजस्व नुकसान हो सकता है.
पत्र में कहा गया है कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटाकर 7.35 प्रतिशत कर दी गई है. कांग्रेस का दावा है कि 0.50 प्रतिशत की यह कटौती 2026 से 2031 के बीच प्रदेश की आर्थिक सेहत पर भारी पड़ेगी. पटवारी ने इसे सीधे तौर पर विकास योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर असर डालने वाला कदम बताया है.
MP में सार्वजनिक ऋण 5.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा
कांग्रेस ने राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति को भी गंभीर बताया है. पत्र के मुताबिक मध्य प्रदेश पर कुल सार्वजनिक ऋण लगभग 5.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो राज्य के वार्षिक बजट से भी अधिक है. चालू वित्तीय वर्ष में ही करीब 72,900 करोड़ रुपये की उधारी लेने का उल्लेख करते हुए कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, तब कर हिस्सेदारी में कटौती प्रदेश को और वित्तीय संकट में धकेल सकती है. फरवरी माह में तीन बार 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की उधारी लेने का जिक्र भी किया गया है.
यहीं नहीं, कांग्रेस ने सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लगाए हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजटीय प्रावधानों का पूरा उपयोग न हो पाने को लेकर कहा गया है कि अधोसंरचना और विकास से जुड़े लगभग 1000 करोड़ रुपये के प्रावधानों में से करीब 70 प्रतिशत राशि खर्च ही नहीं की जा सकी. कांग्रेस का आरोप है कि एक ओर सरकार कर्ज पर निर्भर है, वहीं दूसरी ओर स्वीकृत धनराशि का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा, जो प्रशासनिक अक्षमता और वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है.
18 फरवरी को पेश होना है मध्य प्रदेश का बजट
18 फरवरी को राज्य का वार्षिक बजट पेश होना है. उससे ठीक पहले यह पत्र राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि केंद्र सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति की निगरानी सुनिश्चित करे और ऋण प्रबंधन व राजकोषीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करे.
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