MP News: मध्य प्रदेश में किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. केंद्र सरकार की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के करीब 72 लाख किसानों पर कुल 5 लाख 35 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है. औसतन देखें तो हर किसान पर लगभग 74,440 रुपए का कर्ज है. यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि प्रदेश सरकार का सालाना बजट लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के आसपास है, जबकि किसानों पर कुल कर्ज इससे कहीं अधिक हो चुका है.
किसानों को सबसे ज्यादा कर्ज कहां से दिया गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, किसानों को सबसे अधिक ऋण किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से दिया गया है. खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि उपकरणों के लिए किसान बड़े पैमाने पर कर्ज पर निर्भर हैं. प्रदेश में खेती मुख्य आजीविका का साधन है और बड़ी आबादी सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर हैं , ऐसे में कर्ज का बढ़ता बोझ चिंता का विषय बन गया है.
किसानों को कितना प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है?
हालांकि, राज्य सरकार किसानों को राहत देने के लिए 0 प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण उपलब्ध कराने की योजना संचालित कर रही है. समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को ब्याज में छूट दी जाती है, जिससे उन्हें खेती की तैयारी में सुविधा मिलती है. सरकार का तर्क है कि यह कर्ज निवेश की तरह है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और किसान आत्मनिर्भर बनते हैं.
किसानों की नहीं बढ़ रही आय
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज की बढ़ती मात्रा यह भी संकेत देती है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों की आय उस अनुपात में नहीं बढ़ पा रही. मौसम की अनिश्चितता, फसल की लागत में इजाफा और बाजार में उचित मूल्य न मिलना भी किसानों को कर्ज लेने के लिए मजबूर करता है.
केंद्र की रिपोर्ट पर हो सकता है सियासी घमासान
प्रदेश में पहले भी कर्जमाफी को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है. ऐसे में केंद्र की यह रिपोर्ट आगामी समय में सियासी मुद्दा भी बन सकती है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसानों पर बढ़ते कर्ज का यह बोझ उनकी आय बढ़ाकर कम किया जा सकेगा या फिर राहत योजनाओं की जरूरत और बढ़ेगी.
हर साल किसानों को सरकार कितना पैसा देती है?
- मध्य प्रदेश में किसानों के सम्मान में सरकार उन्हें करीब 6000 का भुगतान करती है.
- इसी तरीके से केंद्र सरकार की ओर से भी 6000 की राशि ट्रांसफर की जाती है.
- कुल मिलाकर किसानों को हर साल 12000 की राशि प्रधानमंत्री किसान सम्मान के तौर पर दी जाती है.
- हालांकि यह योजना शुरुआत में विवादों में रही क्योंकि किसानों को लाभ दिया गया. बाद में रिकवरी का नोटिस भी आया.
- सरकार ने किसानों का गुस्सा देखते हुए तत्काल नोटिस वापस कर लिया था. नोटिस भेजने की वजह थी कि क्योंकि योजना में कई पत्र किसान भी जुड़ गए थे.
