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‘अमचूर’ ने इंजीनियर को पहुंचाया जेल, 57 दिनों की कैद, अब HC ने जांच एजेंसी पर लगाया 10 लाख का जुर्माना, जानें क्या है मामला

mp high court said Gwalior engineer is innocent

सांकेतिक तस्वीर

MP News: एक इंजीनियर को फ्लाइट लेना इतना महंगा पड़ गया कि उसे 57 जेल में गुजारना पड़ा. अब हाई कोर्ट ने राज्य की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था पर तल्ख टिप्पणी करते हुए 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया था.

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक खोत ने कहा कि राज्य की लैब के पास जरूरी उपकरण नहीं है तो फिर इतने बड़े ढ़ांचे और एक्सपर्ट ऑफिसर की टीम की तैनाती का क्या मतलब है. अदालत ने माना कि संसाधनों की कमी से एक निर्दोष व्यक्ति को 57 दिनों तक जेल में गुजारना पड़ा. ये सीधे तौर पर जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार खिलाफ है.

इसके साथ ही न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे एक माह के अंदर राज्य की सभी रीजनल फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला का निरीक्षण करें. इसके साथ ही जरूरी उपकरण और स्टाफ को सुनिश्चित किया जाए.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, ग्वालियर के रहने वाले अजय सिंह, जो पेशे से इंजीनियर हैं. वे 7 मई 2010 को भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ने पहुंचे. एयरपोर्ट पर उनके सामान की सुरक्षा जांच की गई. जिसमें अमचूर और गरम मसाले के पैकेट रखे हुए थे. इन्हें एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर मशीन ने हेरोइन ड्रग्स बताकर अलार्म दे दिया.

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CISF ने गांधीनगर पुलिस थाने को इस बारे में सूचना दी. सैंपल को जांच के लिए 10 मई 2010 को रीजनल फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया. लैब ने सैंपल को ये कहते हुए लौटा दिया कि उनके पास MDET की टेस्टिंग की सुविधा नहीं है. 19 मई 2010 को सैंपल हैदराबाद की केंद्रीय लैब में भेज दिया गया. जहां जांच में पाया गया कि इंजीनियर अजय सिंह के बैग से मिले सैंपल में मादक पदार्थ नहीं है. इसके बाद अजय सिंह को 2 जुलाई 2010 को रिहा कर दिया गया.

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