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MP News: CAG की रिपोर्ट से घिरा लोक निर्माण विभाग, सड़क निर्माण में देरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

CAG Report

सीएजी रिपोर्ट

MP News: मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2019-23 के बीच स्वीकृत 286 कार्यों में से 240 कार्य निर्धारित समयसीमा से 18 दिन से लेकर 2,155 दिन तक देरी से पूरे किए गए. औसत देरी 424 दिन दर्ज की गई। कई परियोजनाओं में 72 प्रतिशत से लेकर 96 प्रतिशत तक कार्य में कमी पाई गई, जो योजना प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है.

नियमों के विपरीत भुगतान, करोड़ों की अनियमितता

कैग ने अगस्त से अक्टूबर 2023 के बीच ग्वालियर और देवास की दो सड़कों के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया है. बिजली पोल शिफ्टिंग के लिए 48 लाख और 1.08 करोड़ रुपये तथा वन भूमि अधिग्रहण के लिए 1.61 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. यह भुगतान सड़क परिवहन मंत्रालय के 2020 के स्वीकृत दिशा-निर्देशों के विपरीत पाया गया. इससे 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का अनुचित व्यय हुआ.

लक्ष्य 2000 किमी, उपलब्धि 1830 किमी

दिसंबर 2021 में राज्य सरकार ने 2000 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया था. इसमें 1860 किमी के लिए बाहरी ऋण (NBD) और 140 किमी राज्य बजट से निर्माण का निर्णय लिया गया. हालांकि केवल 1830 किमी सड़क ही बन सकी, जिससे 8.85 प्रतिशत की भौतिक कमी सामने आई. वर्ष 2023 में 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की स्वीकृत राशि में से 300 मिलियन डॉलर ही समर्पित किए गए, जो परियोजना प्रबंधन में अक्षमता की ओर संकेत करता है.

अमरपाटन-रामपुर सड़क: दोहराया खर्च, फिर भी अधूरापन

सतना संभाग की अमरपाटन-रामपुर सड़क 2011 में बनी थी. 2016 में इसे 30 करोड़ रुपये की लागत से समय से पहले सीसी रोड में अपग्रेड किया गया, लेकिन मूल निर्माण की उपयोगिता प्रमाण-पत्र आज तक उपलब्ध नहीं है. अप्रैल 2017 में पुनः 5 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रारंभ किया गया. 5.12 करोड़ खर्च होने के बाद 2022 में कार्य बंद कर दिया गया, जबकि सड़क उपयोग योग्य स्थिति में थी. बाद में इसे एमपीआरडीसी को हस्तांतरित कर दिया गया. इस प्रक्रिया में 5 करोड़ रुपये का व्यय व्यर्थ साबित हुआ.

182 करोड़ का ठेका बढ़कर 302 करोड़

राजधानी भोपाल के श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर-कोलार मार्ग के निर्माण में भी गंभीर अनियमितता सामने आई. बंसल कंस्ट्रक्शन कंपनी को 182 करोड़ रुपये में (18 प्रतिशत कम दर पर) ठेका दिया गया. बाद में जीएसटी के नाम पर 23 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान किया गया, जबकि टेंडर में जीएसटी शामिल था. कैग के अनुसार मुख्य अभियंता ने बोलियों का समुचित परीक्षण नहीं किया. परिणामस्वरूप 182 करोड़ का ठेका 66 प्रतिशत बढ़कर 302 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और भुगतान भी कर दिया गया.

ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को अनुबंध

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 11 लाख रुपये के छोटे कार्य में देरी करने वाले ठेकेदार को बाद में 4.51 करोड़ रुपये का ठेका दे दिया गया. वहीं, 2018 में धीमी प्रगति के कारण ब्लैकलिस्ट की गई केतन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से 139 करोड़ रुपये का अनुबंध प्राप्त कर लिया. शासन ने 2025 में स्वीकार किया कि ब्लैकलिस्ट स्थिति अपडेट न होने के कारण यह हुआ, लेकिन अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई.

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अतिरिक्त वित्तीय बोझ

समय पर परियोजनाएं पूर्ण न होने के कारण 319.61 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा. फंड प्रबंधन में गड़बड़ी से 68.35 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। सड़कों की क्षति और मरम्मत पर 82 करोड़, मिट्टी के अनुचित उपयोग से 5.65 करोड़, डावेल बार मार्ग पर 58.48 करोड़ और अतिरिक्त डामरीकरण पर 29.90 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय हुआ. वन विभाग की मंजूरी में देरी से 48 परियोजनाएं प्रभावित रहीं और कंक्रीट प्रावधान में त्रुटि के कारण 14.24 करोड़ रुपये का अनावश्यक खर्च हुआ.

जवाबदेही पर सवाल

सीएजी की यह रिपोर्ट विभागीय निगरानी, वित्तीय अनुशासन और तकनीकी परीक्षण की कमी को उजागर करती है. करोड़ों रुपये की अनियमितताओं और अधूरे कार्यों के बीच अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह रिपोर्ट भी केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी.

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