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MP News: एमपी का ‘सरप्राइज इंस्पेक्शन’ मॉडल हिट, राजस्थान-ओडिशा ने मांगी जानकारी, गुणवत्ता पर कसा शिकंजा

Madhya Pradesh Public Works Department (file photo)

मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (फाइल तस्वीर)

MP News: निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उठते सवालों के बीच मध्य प्रदेश ने जो ‘ऑनलाइन औचक निरीक्षण’ मॉडल लागू किया, वह अब दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बनता दिख रहा है. प्रदेश के लोक निर्माण विभाग की यह व्यवस्था इतनी प्रभावी साबित हुई है कि राजस्थान और ओडिशा ने भी इसे अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है.

दोनों राज्यों ने एमपी से क्या जानकारी मांगी है?

दोनों राज्यों ने मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग से इस नवाचार की विस्तृत जानकारी मांगी है. प्रदेश में सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे थे. इसके बाद विभाग ने पारंपरिक निरीक्षण प्रणाली में बदलाव करते हुए डिजिटल और गोपनीय औचक निरीक्षण का फार्मूला लागू किया. पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के अनुसार, निरीक्षण को वास्तविक और निष्पक्ष बनाने के लिए ऑनलाइन औचक निरीक्षण की व्यवस्था शुरू की गई. इससे जवाबदेही तय हुई और गुणवत्ता में ठोस सुधार आया है.

कैसे काम करता है ‘सरप्राइज’ सिस्टम?

कार्रवाई का असर

औचक निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर पिछले एक वर्ष में 80 इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जबकि 7 इंजीनियरों को निलंबित किया गया. इंजीनियरों की कमी का हवाला देकर कुछ हलकों में कार्रवाई पर सवाल उठे, लेकिन विभाग का कहना है कि जवाबदेही तय करना जरूरी है. केवल अधिकारियों पर ही नहीं, ठेकेदारों पर भी सख्ती की गई है. पिछले दो वर्षों में 52 ठेकेदारों को नोटिस दिया गया और 15 को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्माण गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर सीधे कार्रवाई होगी.

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दूसरे राज्यों की नजर

राजस्थान और ओडिशा ने एमपी के इस मॉडल को लागू करने से पहले तकनीकी प्रक्रिया, सॉफ्टवेयर डिजाइन और सैंपल ट्रैकिंग सिस्टम की जानकारी मांगी है. यदि यह मॉडल वहां भी लागू होता है, तो निर्माण गुणवत्ता की निगरानी में डिजिटल पारदर्शिता का नया मानक स्थापित हो सकता है.

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