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NHAI की सड़क चमकी! नरसिंहपुर के आदिवासी परिवार को 13 साल बाद बेघर करने की तैयारी, ग्रामीणों ने लगाई न्याय की गुहार

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नरसिंहपुर: ग्रामीणों ने जताया विरोध

MP News: (नरसिंहपुर से पीयूष दीक्षित की रिपोर्ट) मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में सरकार के लिए सड़क बनाना ‘विकास’ हो सकता है, लेकिन ग्राम बिलधा के गौड़ आदिवासियों के लिए यह ‘विनाश’ साबित हुआ है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 13 साल पहले आदिवासियों की जमीन और मकान तो अधिग्रहित कर लिए, लेकिन उन्हें सम्मान से जीने का हक देना भूल गया. मंगलवार को जब कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में बिलधा के पीड़ित पहुंचे, तो उनकी आंखों में आंसू नहीं बल्कि व्यवस्था के खिलाफ धधकती आग थी.

मुआवजा बना मजाक: कर्ज में डूबे, अब छत को तरसे

आवेदकों ने बेबाकी से कहा कि 2013 में अधिग्रहण के वक्त जो मुआवजा मिला, वह किसी भद्दे मजाक से कम नहीं था. न तो उससे नई जमीन खरीदी जा सकी और न ही पक्का मकान बन पाया. वह मामूली रकम पुराने कर्ज चुकाने में ही स्वाहा हो गई. आज 13 साल बाद जब ये परिवार पूरी तरह टूट चुके हैं, तब प्रशासन उन्हें जबरन बेदखल करने का डंडा चला रहा है.

‘सुसाइडल’ प्लान, नाले किनारे बसाने की साजिश

ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा प्रस्तावित खसरा नंबर 38/2 में विस्थापन की योजना को सिरे से खारिज कर दिया. उनका आरोप है कि प्रशासन उन्हें जिस जगह भेजना चाहता है, वह रहने लायक ही नहीं है. ‘वहां न बिजली है, न सड़क, न पानी. बगल में एक खूनी नाला बहता है. क्या सरकार हमें इंसानों की तरह बसाना चाहती है या जानवरों की तरह नाले में फेंकना चाहती है?

ग्रामीणों ने दो-टूक मांग रखी है कि ग्राम बिलधा की खसरा संख्या 30/1 की खाली सरकारी जमीन को आवासीय घोषित कर उन्हें पट्टे दिए जाएं. साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना का तत्काल लाभ मिले ताकि वे सुरक्षित रह सकें.

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बेघर हुए तो चुप नहीं बैठेंगे

बरसात आने वाली है और आदिवासियों के सिर पर बेदखली की तलवार लटकी है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें बिना सुविधाओं के उजाड़ा गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे. सवाल यह है कि क्या विकास की ऊंची सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों को इन आदिवासियों की चीखें सुनाई देंगी?

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