MP News: मध्य प्रदेश में लगातार हो रहे बाघों और अन्य वन्य प्राणियों के शिकार की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने आज से ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 शुरू कर दिया है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वन मंडलों में सघन गश्त और कड़ी निगरानी की जाएगी. वन विभाग का उद्देश्य शिकारियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखना और उन्हें रंगे हाथों पकड़ना है. इ
सके लिए आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी नेटवर्क के जरिए जंगलों के संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जाएगी. ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 के तहत वन अमले को दिन और रात दोनों समय जंगलों में सक्रिय रहकर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
दिन और रात जंगलों में की जाएगी सघन ग्रस्त
प्रदेश में अब तक 56 बाघों की मौत हो चुकी है, जिसे वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद चिंताजनक माना जा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए 10 जनवरी से 15 फरवरी तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अवधि में टाइगर रिजर्व और वन मंडलों में लगातार गश्त की जाएगी और हर संदिग्ध व्यक्ति तथा गतिविधि पर नजर रखी जाएगी.
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी. ड्रोन से ऊंचाई से जंगलों की निगरानी होगी और सीसीटीवी कैमरों से प्रवेश मार्गों तथा संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जाएगी ताकि शिकारियों को भागने का कोई मौका न मिले.
शिकार में आधुनिक तकनीक का उपयोग
शिकारी अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर शिकार को अंजाम दे रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार नुकीले तार और विद्युत लाइन तार का जाल बिछाकर वन्यजीवों को फंसाया जाता है. वर्ष 2014 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश में विद्युत तार लगाकर शिकार करने के 933 प्रकरण दर्ज किए गए हैं.
इनमें 322 जंगली सूअर, 118 नीलगाय, 101 तेंदुआ और 39 बाघों के शिकार के मामले शामिल हैं. अब तक 429 शिकार करने वाले अपराधियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है. बावजूद इसके शिकार की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, इसलिए ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 के जरिए वन विभाग ने शिकारी गिरोहों पर निर्णायक प्रहार करने की रणनीति बनाई है.
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