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MP News: PHQ ने क्राइमवार फिक्स की फोरेंसिक एक्सपर्ट की प्रायोरिटी, साइंटिस्ट की कमी के बीच निकला रास्ता

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सांकेतिक तस्वीर

MP News: मध्य प्रदेश में फॉरेंसिक एक्सपर्ट की कमी है. इसलिए पुलिस मुख्यालय ने 3 अपराध श्रेणियां में जिम्मेदारी दी है. जिसमें अति आवश्यक, आवश्यक और सामान्य श्रेणी में अपराधों का वर्गीकरण किया है. इसके साथ यह भी तय किया है कि किसी अपराध में तात्कालिक फॉरेंसिक की टीम को बुलाया जाना है. किन अपराधों में जरूरत पड़ने पर बुलाया जा सकता है. अपराधों के अनुसार साक्ष्य आकलन के लिए अपराध की धारा अनुसार वर्गीकरण किया गया है. पुलिस से मुख्यालय ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है अब इसमें अपराधों के वर्गीकरण को भी बताया गया है.

18 अपराधों को वर्गीकृत किया गया

अति आवश्यक में 18 अपराधों को वर्गीकृत किया गया है. जिसमें बलात्कार, दहेज हत्या, आतंकवाद, एसिड अटैक, डकैती, एनडीपीएस एक्ट, राज्य के विरुद्ध अपराध मानव तस्करी, संगठित अपराध, आतंकवादी कृत्य, विस्फोटक अधिनियम, आतंकवाद निवारण अधिनियम आबकारी अधिनियम, वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में शामिल चुनिंदा धाराओं को शामिल किया गया है. इसमें थाना प्रभारी का दायित्व होगा कि वह तत्काल फॉरेंसिक की विशेषज्ञ को सूचित करके और फोरेंसिक एक्सपर्ट को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने के लिए सूचना देंगे.

आपराधिक संबंध में धाराओं को शामिल किया गया

आवश्यक वर्ग में ऐसे अपराधों की प्रवृत्ति को शामिल किया गया जिसमें घटनास्थल पर साक्ष्य की उपलब्धता और फोरेंसिक एक्सपर्ट की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए थाना प्रभारी उन्हें बुला सकेंगे. इसमें हत्या का प्रयास, गंभीर चोट, लूट चोरी, अपहरण, जहर देकर शारीरिक नुकसान पहुंचाना, हत्या करने के लिए अपहरण फिरौती के लिए अपहरण, दस्तावेजों संबंधित जालसाजी, धोखाधड़ी, छेड़छाड़ बच्चों से संबंधित अपराध, विवाह संबंधी अपराध, बैंक नोट और सरकारी स्टांप की अपराध के संबंध में कुछ धाराओं को शामिल किया गया है.

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फॉरेंसिक एक्सपर्ट के कमी से न्याय मिलने में देरी

मध्य प्रदेश में फोरेंसिक एक्सपर्ट की भारी कमी है. जिसके कारण लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है. इसके साथ ही सरकार ने भले ही नए कानून को लागू कर दिया है लेकिन फिर भी देरी हो रही है. प्रदेश में वैज्ञानिक अधिकारियों के कुल 299 पद स्वीकृत है. जिसमें से 140 ही भरे हैं. इससे स्पष्ट की 53 फ़ीसदी पद खाली है. इसके कारण प्रदेश में फोरेंसिक लैब में 35000 सैंपलों का अभी तक निराकरण नहीं हो चुका है.

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