MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने बजट में एक अहम घोषणा करते हुए प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर हेलीपैड युक्त स्टेडियम बनाने का प्रावधान किया है. इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. सरकार का दावा है कि इससे खेल अधोसंरचना मजबूत होगी, वहीं जनप्रतिनिधियों को क्षेत्रीय दौरे में सुविधा मिलेगी.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित स्टेडियम बहुउद्देश्यीय होंगे. इनमें स्थानीय खिलाड़ियों के लिए खेल मैदान, ट्रैक और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. साथ ही प्रत्येक स्टेडियम परिसर में हेलीपैड का निर्माण किया जाएगा, ताकि मंत्री और विधायक सीधे अपने क्षेत्र में उतर सकें और विकास कार्यों की समीक्षा कर सकें.
विकास या विशेष सुविधा?
सरकार इस योजना को खेल प्रोत्साहन और प्रशासनिक दक्षता से जोड़कर देख रही है. तर्क दिया जा रहा है कि आपातकालीन परिस्थितियों में हवाई सुविधा उपयोगी साबित होगी. इसके अलावा बड़े आयोजनों और वीआईपी दौरों के लिए भी यह ढांचा काम आएगा.
हालांकि विपक्ष इसे ‘जनप्रतिनिधियों की सुविधा’ से जोड़कर सवाल खड़े कर सकता है. आलोचकों का कहना है कि प्रदेश में अभी भी कई क्षेत्रों में बुनियादी जरूरतें जैसे – सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा प्राथमिकता मांगती हैं. ऐसे में हेलीपैड युक्त स्टेडियम पर खर्च को लेकर बहस तेज होना तय है.
बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो यह प्रदेश के इतिहास की बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं में से एक मानी जाएगी. 230 विधानसभा क्षेत्रों में निर्माण के लिए जमीन चयन, बजट आवंटन और कार्यान्वयन की प्रक्रिया अहम होगी.
इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्टेडियम वास्तव में स्थानीय खिलाड़ियों के उपयोग में आते हैं या नहीं. फिलहाल बजट प्रावधान के बाद अब अगला कदम प्रशासनिक मंजूरी और कार्ययोजना का है. आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि यह घोषणा किस रफ्तार से जमीन पर उतरती है.
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