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सतना के इस गांव में ‘सैनिकों की नर्सरी’, 500 से ज्यादा लोग सेना में संभाल रहे मोर्चा

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सतना जिले के चूंद गांव को सैनिकों की नर्सरी कहा जाता है

MP News: मध्य प्रदेश के सतना जिले के रामपुर बघेलान विधानसभा का एक गांव ऐसा है, जहां की मिट्टी को माथे में लगाने का मन करता है. नमन करने का मन करता है क्योंकि जब पूरा देश चैन की नींद सोता है, तब सरहद पर खड़े हमारे जवान दिन-रात दुश्मनों से लोहा ले रहे होते हैं. सतना जिले का एक गांव ऐसा है, जो न केवल जागता है बल्कि भारत की सीमाओं को मजबूत बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है.

500 से ज्यादा जवान सेना में सेवाएं दे रहे

सतना जिले का चूंद गांव, जो जनसंख्या में भले ही छोटा है, लेकिन जज्बे में पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है. इस गांव की खासियत यह है कि यहां के 500 से ज्यादा लोग फौज में हैं. 300 से ज्यादा जवान वर्तमान में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, और आजादी के पहले से लेकर अब तक देश की सुरक्षा में जिसकी अहम भूमिका रही है.

तीनों सेनाओं में संभाल रहे मोर्चा

इस धरती का हर युवा, देश की सुरक्षा और सेना में जाने का जज्बा पालता है. सतना जिले का चूंद एक ऐसा गांव है, जहां का हर एक घर भारतीय सेना से जुड़ा हुआ है. चूंद गांव में किसी भी घर में कदम रखें, तो वहां कोई न कोई सैनिक मिल जाएगा. कोई फौज में है, कोई नेवी में, कोई एयरफोर्स में, तो कोई किसी स्पेशल कमांडो यूनिट का हिस्सा है. जहां देश के अधिकांश माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर या अफसर बनें, वहीं चूंद गांव के मां-बाप अपने बच्चों को सिर्फ और सिर्फ फौज में भेजना चाहते हैं.

इस गांव के दो ही सबसे बड़े त्योहार

इस गांव में 26 जनवरी 15 अगस्त से बड़ा कोई त्यौहार नहीं होता है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि 7 पीढ़ियों से उनके परिवार सेना में सेवाएं दे रहे हैं. पुराने समय में जब रीवा रियासत रही है तब से लेकर आज तक यह परंपरा लगातार चली आ रही है. द्वितीय विश्व युद्ध, 1962 का चीन युद्ध, 1965 और 1971 की पाकिस्तान से जंग, कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर हर युद्ध में चूंद गांव के सपूतों ने हिस्सा लिया और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया. भारत की लगभग हर एक बटालियन में यहां के जवान अपनी सेवाएं दे रहे. मिशन सिंदूर के तहत हुई सैन्य कार्रवाई में चूंद गांव के 300 जवान पाकिस्तान की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया है.

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सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाध्यापक बताते हैं कि उनके पढ़ाये हुई सैकड़ों छात्र देश की सुरक्षा कर रहे हैं. उन्हें इस बात का बहुत गर्व है. इस गांव का हर बच्चा बड़ा होकर सेना में सेवाएं देना चाहता है, न केवल बच्चे बल्कि यहां की बच्चियां भी सेना में जाना चाहती हैं.

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