MP News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में राजस्व विभाग के अधिकारी का काला कारनामा सामने आया है. हुजूर तहसीलदार पर जमीन के नामांतरण के बदले प्लॉट लेने का आरोप लगा है. प्लॉट की रजिस्ट्री भी परिजनों के नाम कराई गई है. जमीन लेने के बाद भी जब नामांतरण की कार्रवाई नहीं हुई तो इसकी शिकायत लोकायुक्त एसपी रीवा से की गई है. लोकायुक्त ने मामले में तहसीलदार और पटवारियों को नोटिस जारी कर बयान के लिए तलब किया है.
क्या है पूरा मामला?
रीवा हर मामले में सुर्खियों में है. अभी तक विभागों में सिर्फ घोटाले ही सामने आ रहे थे. रिश्वत लेने के मामले में राजस्व अधिकारी आए दिन ट्रैप हो रहे थे. अब नया मामला काम के बदले जमीन लेने का सामने आया है. यह मामला रीवा हुजूर तहसील का है. रीवा हुजूर अंतर्गत करही में एक जमीन का नामांतरण का मामला तहसीलदार के पास पहुंचा था. जमीन का नामांतरण की फाइल कई दिनों तक तहसील में लटकी रही. फिर नामांतरण के लिए भूस्वामी के सामने शर्त रखी गई. तहसीलदार ने नामांतरण की कार्रवाई करने के लिए भूमि स्वामी से प्लॉट की मांग की। प्लॉट भी ले लिया. जमीन की रजिस्ट्री भी करा ली गई, लेकिन नामांतरण की कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद पीड़ित ने एसपी लोकायुक्त की शरण ली. लोकायुक्त से मामले की शिकायत की गई है. लोकायुक्त एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में तहसीलदार हुजूर सहित पटवारियों को नोटिस जारी किया है। इन सभी को बयान के लिए तलब किया गया है. जांच अभी जारी है.
लाडली लक्ष्मी मार्ग पर मौजूद है जमीन
जिस जमीन के नामांतरण के बदले प्लॉट लिया गया है वह जमीन लाडली लक्ष्मी पथ के किनारे ही मौजूद है. इस पर प्लॉटिंग की जा रही थी. विवाद के कारण कई महीनों से खरीदी-बिक्री बंद है. यह भूमि जबलपुर के विवेकानंद वार्ड निवासी ऊमा सिंह ठाकुर व अन्य की बताई जा रही है. इस भूमि पर प्लॉटिंग कर बेचने की पॉवर ऑफ अटार्नी भोला सिंह पिता वीरन सिंह को दी गई है. इसी प्लॉटिंग में दो प्लॉट तहसीलदार के परिजनों के नाम रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाया गया है.
पटवारी बने रजिस्ट्री में गवाह
इस मामले में दो बिंदुओं पर एसपी लोकायुक्त के पास शिकायत की गई है. इसमें तहसीलदार के परिजनों के नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने के साथ ही पटवारियों की भी शिकायत की गई है. परिजनों के नाम हुई रजिस्ट्री में पटवारी ही गवाह बनाए गए हैं. इतना ही नहीं राजस्व अधिकारी को जमीन मिलने के बाद पटवारियों का भी इमान डोलने लगा था. वह भी जमीन के लिए लैंडलार्ड पर दबाव बनाना शुरू कर दिए थे.
इसलिए तेजी से फल-फूल रहा अवैध कारोबार
रीवा में अधिकारियों ने रिश्वत लेने का अब शायद नया तरीका तलाश लिया है. यही वजह है कि रीवा शहर में अवैध प्लाटिंग का अवैध कारोबार तेजी से फल फूल रहा है. नगद लेने में लोकायुक्त के हाथों पकड़े जाने का भी डर है. यही वजह है कि अब अधिकारियों ने काम के बदले जमीन लेने का खेल शुरू कर दिए हैं. इस मामले के सामने आने के बाद रीवा जिला प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में आ गई है.
शिकायत के बाद पटवारी को हटाया गया
इस खेल में सिर्फ तहसीलदार ही शामिल नहीं थे. बोदाबाग, करही हलका में पदस्थ पूर्व महिला और उसके भी पहले पदस्थ पुरुष पटवारी की भूमिका भी संदिग्ध रही. इन्हीं दोनों पटवारियों की पदस्थापना के दौरान ही यह खेल हुआ था. इसके बाद पटवारियों ने भी दबाव बनाना शुरू कर दिया था. इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की गई. जिला प्रशासन ने महिला पटवारी को करही से हटाते हुए पहले लक्ष्मणपुर भेज दिया था. बाद में सिफारिश पर मैदानी में पदस्थ कर दिया है.
सुर्खियों में है राजस्व विभाग का यह कारनामा
लोकायुक्त में पहुंची यह शिकायत इस समय चर्चा का विषय बन गई है. जिला प्रशासन के अधिकारियों पर पहले से ही गंभीर आरोप लगते रहे हैं. इसके पहले भी भू-अर्जन की राशि का निजी बैंकों में रखने का मामला सामने ही आया था. करोड़ों रुपए राजस्व अधिकारियों ने प्राइवेट बैंक में जमा कर दिया था. इस मामले में एक कर्मचारी की भी संलिप्तता मिली थी. फर्जी एकाउंट खोल कर किसानों के भू-अर्जन की राशि की ब्याज डकार रहे थे. अब नया मामला काम के बदले जमीन का सामने आया है. तहसील और कलेक्ट्रेट में अधिकारी का यह कारनामा चर्चाओं में है.
तहसीलदार हुजूर और पटवारियों के खिलाफ शिकायत की गई है. परिजनों के नाम प्लॉट की रजिस्ट्री की शिकायत है. मामले की जांच की जा रही है.
