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चित्रकूट में भारी बारिश से तबाही का मंजर! रामघाट पर बना 41 साल पुराना पुल हुआ धराशायी, कई मंदिर-घर मलबे में तब्दील

chitrakoot flood

चित्रकूट बाढ़

Chitrakoot Rain: चित्रकूट को भगवान राम की धरती कहा जाता है. माना जाता है कि उन्होंने वनवास के दौरान यहां 11 बिताए थे. पवित्र नगरी के रहवासी इन दिनों भारी बारिश से हुई तबाही का दंश झेल रहे हैं. जिसकी तस्वीरें देखकर हर कोई सिहर उठा है. रामघाट और भारतघाट समेत नदी किनारे के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों की पहली मंजिल तक पहुंच गया. कहीं मकान का हिस्सा भरभराकर गिर गया तो कहीं पूरा मलबा सड़क पर फैल गया. लोगों की जिंदगी भर की जमा पूंजी, पैसे, जेवर और गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया. हालात ऐसे हैं कि कई परिवार अब अपना घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं.

रामघाट से जानकीकुंड तक बाढ़ का कहर

रामघाट और भारतघाट के आसपास का इलाका बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है. कई घरों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच गया, जबकि कई जगह मकानों के हिस्से गिरने से चारों तरफ मलबा ही मलबा दिखाई दे रहा है.

जिन परिवारों के घर दो मंजिल के थे, उनमें भी कई लोगों का सब कुछ पानी में डूब गया. घर में रखे पैसे, अनाज, कपड़े, जरूरी सामान यहां तक की सोने-चांदी के जेवर तक खराब हो गए. लोगों का कहना है कि उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई. अब सामने सबसे बड़ा सवाल है कि घर उजड़ने के बाद जिंदगी दोबारा कैसे शुरू होगी.

जानकीकुंड से लगे इलाकों में भी बाढ़ का कहर साफ दिखाई दे रहा है. कई मंदिर पानी में पूरी तरह डूब गए. साधु-संतों की कुटिया और आश्रम भी बाढ़ से अछूते नहीं रहे. धार्मिक नगरी चित्रकूट में शायद ही कोई ऐसा वर्ग हो, जो इस आपदा से प्रभावित न हुआ हो.

41 साल पुराना पुल हुआ धराशायी

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब रामघाट का पुल जो 1985 में बना था. भरभराकर धराशायी हुआ, तो उसकी आवाज और धमक पूरे चित्रकूट में महसूस की गई. उस वक्त लोगों को लगा कि आसपास की इमारतें भी कहीं न गिर जाएं. दहशत के बीच लोग अपनी जान बचाने के लिए नावों का सहारा लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकलते नजर आए.

कहीं पुल पानी में समा गए हैं, तो कहीं पुलों के ऊपर से अब भी पानी बह रहा है. नदी का बहाव इतना तेज है कि बड़े-बड़े विशालकाय पेड़ तक जड़ से उखड़कर पानी में बहते दिखाई दे रहे हैं. सड़कें मलबे से पटी हैं और कई इलाकों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित है.

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राहत और बचाव कार्य तेज

हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है. कलेक्टर सतीश कुमार के मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर सड़कों पर फैले मलबे को हटाने का काम कराया जा रहा है. साथ ही बाढ़ के बाद बीमारी और महामारी का खतरा न बढ़े, इसके लिए प्रभावित इलाकों में दवाइयां और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है. वहीं, विधायक सुरेंद्र सिंह अहिरवार खुद मोर्चा संभाले हुए हैं. विधायक बाढ़ प्रभावित इलाकों में पैदल पहुंचकर लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को मौके पर ही समझने की कोशिश कर रहे हैं.

बाढ़ का पानी तीसरी मंजिल तक पहुंचा

चित्रकूट में मंदाकिनी की बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि अब इसके उद्गम स्थल सती अनुसुइया में भी बाढ़ का भयावह मंजर सामने आया है. सती अनुसुइया आश्रम और आसपास का पूरा इलाका मंदाकिनी के उफान की चपेट में आ गया. प्रशासन ने भी सुरक्षा के लिहाज से इस इलाके में आवाजाही रोक दी है. पहाड़ियों के पत्थर खिसक कर सड़क में आ गए पेड़ सब धराशाई हो गये.

हालात इतने भयावह थे कि बाढ़ का पानी इमारतों की तीसरी मंजिल तक पहुंच गया. पानी के चारों तरफ घिर जाने से साधु-संत भी यहां फंस गए. जिन स्थानों पर सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ और धार्मिक गतिविधियां दिखाई देती हैं, वहां इस वक्त सिर्फ पानी और तबाही का मंजर नजर आ रहा है.

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कई धार्मिक स्थल बंद

बाढ़ के पानी ने यहां कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों को अपनी चपेट में ले लिया. कई मंदिर पूरी तरह जलमग्न दिखाई दे रहे हैं, जबकि आश्रम परिसर में भी भारी नुकसान की तस्वीरें सामने आ रही हैं. चित्रकूट के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों, गुप्त गोदावरी और हनुमानधारा तक जाने वाले रास्ते भी बाढ़ के कारण बंद किए गए हैं.

मंदाकिनी के इस विकराल रूप ने पूरे चित्रकूट को हिलाकर रख दिया है. रामघाट से लेकर सती अनुसुइया तक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. कई मंदिर, घाट, दुकानें और मकान पानी में डूब गए हैं और अब पानी उतरने के बाद तबाही का असली मंजर सामने आ रहा है.

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