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सीधी में महुआ से बन रहे लड्डू, एक समय इसी से बनती थी शराब! भोपाल से लेकर इंग्लैंड बढ़ी डिमांड

Mahua Ladoo

महुआ लड्डू

Mahua Ladoos: जिस महुआ के फूलों का इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों में मुख्य रूप से शराब बनाने के लिए किया जाता था, वही अब मध्य प्रदेश के सीधी जिले की महिलाओं की कमाई का जरिया बन गया है. यहां स्व-सहायता समूहों की महिलाएं महुआ से पौष्टिक लड्डू, अचार और दूसरे खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं. उनके बनाए उत्पादों की मांग भोपाल से लेकर इंग्लैंड तक पहुंच गई है. यह पहल न केवल महुआ को नई पहचान दे रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद कर रही है.

महुआ से रोजगार की नई शुरुआत

सीधी जिले में महुआ के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. यहां की महिलाओं ने पारंपरिक वन उपज का बेहतर इस्तेमाल करते हुए इससे खाद्य सामग्री बनाने का काम शुरू किया है. सीधी शहर के हर्बल कैफे और वन धन उत्पाद केंद्र के माध्यम से इन उत्पादों को तैयार करने और बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल रही है. इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं.

संस्था से मिली जानकारी, फिर शुरू किया काम

ग्राम तिलवानी की रहने वाली राज लक्ष्मी बंधन स्व-सहायता समूह की सदस्य चंद्रावती सिंह गौड़ के मुताबिक, पहले गांवों में महुआ के फूलों का इस्तेमाल ज्यादातर शराब बनाने के लिए किया जाता था. इसके बाद एक संस्था के माध्यम से महिलाओं को जानकारी मिली कि महुआ से लड्डू, अचार और अन्य खाद्य पदार्थ भी बनाए जा सकते हैं. इस जानकारी ने उन्हें महुआ के इस्तेमाल का नया रास्ता दिखाया.

छोटी शुरुआत से बढ़ने लगी मांग

महिलाओं ने समूह बनाकर शुरुआती दौर में सीमित स्तर पर महुआ के उत्पाद तैयार किए. धीरे-धीरे लोगों को इनका स्वाद पसंद आने लगा और उत्पादों की मांग बढ़ने लगी. इसके बाद महिलाओं ने इस काम को नियमित रोजगार के रूप में आगे बढ़ाया. अब महुआ उनके लिए केवल जंगल से मिलने वाला उत्पाद नहीं, बल्कि आमदनी बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन रहा है.

ऐसे तैयार होते हैं महुआ के पौष्टिक लड्डू

हर्बल कैफे की कर्मचारी अनुप्रिया कुशवाहा ने बताया कि महुआ के फूल प्राकृतिक रूप से मीठे होते हैं. लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले सूखे फूलों को अच्छी तरह साफ किया जाता है और फिर घी में भूना जाता है. इसके बाद इसमें गुड़ मिलाया जाता है. स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए तिल, मूंगफली, सूखा नारियल और पसंद के मेवे भी डाले जाते हैं. इस तरह पारंपरिक वन उपज से एक नया खाद्य उत्पाद तैयार किया जाता है.

भोपाल से इंग्लैंड तक पहुंच रही सीधी की पहचान

वन विभाग के सहयोग से संचालित केंद्रों के जरिए महुआ से बने उत्पादों को बाजार मिल रहा है. इनकी पहुंच स्थानीय क्षेत्र से आगे बढ़कर भोपाल और इंग्लैंड तक हो चुकी है. इससे सीधी के महुआ को नई पहचान मिल रही है और महिलाओं के लिए कमाई की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं. यह पहल बताती है कि स्थानीय संसाधनों को नए तरीके से इस्तेमाल करके ग्रामीण महिलाएं रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं और अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचा सकती हैं.

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