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मऊगंज: ग्राम पंचायतों में सचिवों की नियुक्ति के लिए दो गांव के बीच घटा दीं दूरियां, दस्तावेजों में धांधली

Mauganj Irregularities in appointment of secretaries distance between two villages reduced

जनपद पंचायत हनुमना

Mauganj News: मऊगंज जिले की जनपद पंचायत हनुमना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है. इस बार मामला ग्राम पंचायतों के अतिरिक्त प्रभार (अतिरिक्त चार्ज) के आवंटन में कथित अनियमितताओं का है, जहां आरोप है कि अधिकारियों ने अपने चहेते सचिवों को लाभ पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायतों के बीच की वास्तविक दूरियों को ही सरकारी दस्तावेजों में बदल दिया. आरोप है कि कहीं वास्तविक दूरी को कम दिखाया गया तो कहीं कम दूरी को कई किलोमीटर अधिक दर्शा दिया गया, ताकि पहले से तय सचिवों को अतिरिक्त प्रभार दिलाया जा सके और वास्तविक रूप से पात्र सचिवों को दौड़ से बाहर किया जा सके. पूरे मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं.

8 किलोमीटर को बना दिया 2 किलोमीटर

जिला पंचायत रीवा को भेजे गए प्रस्ताव क्रमांक-506 में ग्राम पंचायत देवरा के अतिरिक्त प्रभार के लिए तीन सचिवों का पैनल तैयार किया गया. आरोप है कि बेलहा में पदस्थ सचिव जितेन्द्र सिंह तिवारी की वास्तविक दूरी लगभग 8 किलोमीटर होने के बावजूद दस्तावेजों में इसे मात्र 2 किलोमीटर दर्ज कर दिया गया. वहीं, खैरा-3 के सचिव रामकैलाश कुशवाहा की दूरी लगभग 4 किलोमीटर दर्शाई गई, जबकि बिछरहता के सचिव दशरथ नामदेव, जो पहले से ही पटेहरा पंचायत का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, उनका नाम भी पैनल में शामिल कर दिया गया. आरोप है कि यह पूरा पैनल केवल औपचारिकता निभाने के लिए बनाया गया ताकि पहले से तय सचिव को प्राथमिकता दिलाई जा सके.

उलट दी गई दूरी की परिभाषा

इसी तरह प्रस्ताव क्रमांक-439 में ग्राम पंचायत बन्ना जवाहर सिंह के अतिरिक्त प्रभार को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं. आरोप है कि बिझौली गहरवरान के सचिव शिवबहोर तिवारी की वास्तविक दूरी 10 किलोमीटर से अधिक होने के बावजूद उसे केवल 6 किलोमीटर दिखाया गया. दूसरी ओर गोपला पंचायत के सचिव रामबहादुर पटेल, जिनकी वास्तविक दूरी लगभग 2 किलोमीटर बताई जा रही है, उनकी दूरी सरकारी दस्तावेजों में 7 किलोमीटर दर्शाकर उन्हें पीछे धकेलने का प्रयास किया गया. वहीं हाटा पंचायत के सचिव राकेश कुमार पाण्डेय की दूरी 8 किलोमीटर अंकित की गई. आरोप है कि इस पूरे पैनल का उद्देश्य पहले से तय नाम को नियमों के अनुरूप दिखाकर मंजूरी दिलाना था.

औपचारिकता के लिए पैनल, फैसला पहले से तय?

स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि तीन-तीन नामों का पैनल केवल नियमों की औपचारिकता पूरी करने के लिए तैयार किया गया, जबकि वास्तविक निर्णय पहले से तय था. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जो अधिकारी नियमित रूप से संबंधित ग्राम पंचायतों का निरीक्षण करते हैं, क्या उन्हें गांवों के बीच की वास्तविक दूरी की जानकारी नहीं थी? यदि गलती अनजाने में हुई होती तो एक-दो मामलों तक सीमित रहती, लेकिन अलग-अलग प्रस्तावों में दूरी घटाने और बढ़ाने के आरोप पूरे मामले को संदेहास्पद बना रहे हैं.

जनपद से संलग्न सचिवों की अनदेखी पर भी सवाल

मामले का एक और अहम पहलू यह है कि जनपद पंचायत हनुमना में पिछले लंबे समय से पांच से छह सचिव जनपद कार्यालय से संलग्न बताए जा रहे हैं. आरोप है कि उन्हें अतिरिक्त प्रभार देने के बजाय ऐसे सचिवों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिनके नाम कथित रूप से पहले से तय हैं. इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या अतिरिक्त प्रभार केवल प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर दिए जा रहे हैं या फिर इसके पीछे आर्थिक लाभ और अन्य स्वार्थ जुड़े हुए हैं.

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जिला प्रशासन की भूमिका पर निगाहें

पूरा मामला सामने आने के बाद अब निगाहें जिला पंचायत रीवा और जिला प्रशासन पर टिक गई हैं. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल दूरी की गणना में त्रुटि का मामला नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों में तथ्यात्मक हेरफेर कर नियमों को प्रभावित करने का गंभीर प्रकरण माना जा सकता है. ऐसे में मांग उठ रही है कि प्रस्तावों में दर्ज दूरियों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

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